नई दिल्ली: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर सीबीएसई की तीन-भाषा नीति को मौजूदा शैक्षणिक सत्र के बीच में लागू किए जाने पर चिंता जताई है। उन्होंने केंद्र सरकार से इस नीति के क्रियान्वयन पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
अपने पत्र में दिग्विजय सिंह ने लिखा, "मुझे सीबीएसई की कक्षा 9 के छात्रों के अभिभावकों के एक समूह का ज्ञापन प्राप्त हुआ है, जिसमें मौजूदा सत्र के बीच तीन-भाषा नीति को अनिवार्य रूप से लागू करने का विरोध किया गया है।" उन्होंने कहा कि अभिभावकों द्वारा उठाई गई चिंताएं वास्तविक हैं और तत्काल ध्यान देने योग्य हैं। उनके अनुसार, पर्याप्त शिक्षकों, पाठ्यपुस्तकों और संक्रमण अवधि के बिना इस नीति को अचानक लागू करने से छात्रों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
Congress Rajya Sabha MP Digvijaya Singh has written to Prime Minister Narendra Modi urging an immediate hold on the mandatory implementation of CBSE's Three-Language Policy for Class IX students pic.twitter.com/d2kikLUALs
— IANS (@ians_india) June 7, 2026
15 मई को CBSE ने तीसरी भाषा से संबंधित परिपत्र किया जारी
दिग्विजय सिंह ने कहा कि दिसंबर 2025 में हुई सीबीएसई की गवर्निंग बॉडी की बैठक में यह निर्णय लिया गया था कि एनसीईआरटी द्वारा भाषाओं की ग्रेडेड पाठ्यपुस्तकें जारी होने तक स्कूल मौजूदा भाषा व्यवस्था को जारी रखें। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बावजूद सीबीएसई ने 15 मई 2026 को एक परिपत्र जारी कर 1 जुलाई 2026 से कक्षा 9 में तीसरी भाषा की पढ़ाई अनिवार्य करने का निर्देश दे दिया।
1 जुलाई 2026 से 3 भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य
उल्लेखनीय है कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने 1 जुलाई 2026 से कक्षा 9 के छात्रों के लिए तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य कर दिया है। हालांकि, बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि कक्षा 10 में तीसरी भाषा (आर-3) की कोई बोर्ड परीक्षा नहीं होगी।
CBSE द्वारा गवर्निंग बॉडी के फैसले की अवमानना पर उठे सवाल
दिग्विजय सिंह ने कहा कि एनसीईआरटी ने अभी तक नई ग्रेडेड भाषा पुस्तकों को जारी नहीं किया है और फिलहाल सीबीएसई ने कक्षा 6 की एनसीईआरटी पुस्तकों के उपयोग की सिफारिश की है।उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर सीबीएसई ने अपनी ही गवर्निंग बॉडी के फैसले को कैसे और क्यों पलट दिया, जबकि इससे देशभर के हजारों स्कूलों की शैक्षणिक योजना प्रभावित हो सकती है।
राज्यसभा सांसद ने कहा कि दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर राज्यों के छात्रों के लिए स्थिति और भी कठिन है, जहां हिंदी व्यापक रूप से नहीं बोली जाती और कई स्थानीय जनजातीय भाषाएं सीबीएसई की मान्यता प्राप्त भाषा सूची में शामिल नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि संस्कृत कई स्कूलों में तीसरी भाषा के रूप में लोकप्रिय विकल्प बनकर उभरी है, लेकिन योग्य संस्कृत शिक्षकों और उपयुक्त पाठ्यपुस्तकों की भारी कमी है, जिससे इस भाषा को बढ़ावा देने का उद्देश्य ही प्रभावित हो सकता है।
दिग्विजय सिंह ने की पत्र में पीएम मोदी से सिफारिश
दिग्विजय सिंह ने अपने पत्र में कहा, "सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मेरी विनम्र सिफारिश है कि वर्तमान कक्षा 9 के छात्रों के लिए इस नीति के क्रियान्वयन को तत्काल प्रभाव से स्थगित किया जाए।"
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि मामला न्यायालय में विचाराधीन है और अदालत का फैसला 15 जुलाई 2026 को आने की संभावना है, जबकि स्कूलों को 1 जुलाई 2026 से ही तीसरी भाषा पढ़ाना शुरू करना है। उन्होंने प्रधानमंत्री से इस विषय पर शीघ्र और संवेदनशील विचार करने की अपील करते हुए कहा कि लाखों छात्रों का शैक्षणिक भविष्य इस निर्णय से जुड़ा हुआ है।
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