नई दिल्ली:  भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने ब्याज दरों को लेकर बड़ा फैसला लेते हुए रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की है। इसके साथ ही रेपो रेट बढ़कर  5.50%  हो गई है। करीब साढ़े तीन साल के अंतराल के बाद हुई इस बढ़ोतरी का असर बैंकिंग व्यवस्था के साथ-साथ आम ग्राहकों के कर्ज और बचत पर भी दिखाई दे सकता है।

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को तीन दिवसीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद फैसले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मौजूदा आर्थिक और वित्तीय परिस्थितियों, हालिया वैश्विक घटनाक्रम तथा भविष्य की संभावनाओं की समीक्षा के बाद समिति ने रेपो रेट बढ़ाने का फैसला किया।

रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की वृद्धि का मतलब है कि RBI से बैंकों को मिलने वाली अल्पकालिक फंडिंग की लागत बढ़ सकती है। इसका सीधा असर तुरंत हर तरह के लोन पर पड़े, यह जरूरी नहीं है, लेकिन बैंक अपनी ब्याज दरों की समीक्षा कर सकते हैं। खासकर फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन और अन्य कर्ज लेने वाले ग्राहकों पर इसका असर देखने को मिल सकता है।

SDF और MSF रेट में भी बदलाव

रेपो रेट बढ़ाने के साथ RBI ने अन्य संबंधित दरों में भी बदलाव किया है। Standing Deposit Facility (SDF) की दर 5.25%  हो गई है, जबकि Marginal Standing Facility (MSF) और बैंक रेट 5.75%  पर पहुंच गए हैं।

इन दरों में बदलाव का उद्देश्य बैंकिंग सिस्टम में नकदी और ब्याज दरों को मौद्रिक नीति के अनुरूप नियंत्रित करना होता है। RBI के फैसले का असर आने वाले समय में बैंकों की लोन और डिपॉजिट दरों पर निर्भर करेगा।

होम लोन और कार लोन लेने वालों पर क्या असर?

रेपो रेट में बढ़ोतरी का सबसे बड़ा सवाल उन लोगों के लिए है जिनकी EMI चल रही है। अगर बैंक अपनी बाहरी बेंचमार्क से जुड़ी लोन दरों में बढ़ोतरी करते हैं, तो  फ्लोटिंग रेट होम लोन, कार लोन और अन्य कर्ज  महंगे हो सकते हैं।

ऐसी स्थिति में बैंक दो तरह से असर डाल सकते हैं—EMI बढ़ सकती है या लोन की अवधि बढ़ सकती है। हालांकि वास्तविक असर बैंक की ब्याज दर, ग्राहक के लोन की शर्तों और बकाया राशि पर निर्भर करेगा।

उदाहरण के तौर पर, यदि किसी ग्राहक का होम लोन फ्लोटिंग ब्याज दर पर है, तो बैंक द्वारा ब्याज दर बढ़ाने के बाद उसकी मासिक किस्त में बदलाव हो सकता है। इसलिए मौजूदा और नए दोनों तरह के कर्ज लेने वालों के लिए RBI का यह फैसला महत्वपूर्ण है।

FD और सेविंग्स पर मिल सकता है अलग असर

रेपो रेट बढ़ने का प्रभाव केवल कर्ज लेने वालों तक सीमित नहीं रहता। बैंक अपनी जमा दरों में भी बदलाव कर सकते हैं। ऐसे में  FD और अन्य बैंक डिपॉजिट पर ब्याज दरें बढ़ने की संभावना  बन सकती है।

हालांकि हर बैंक अपनी जमा और कर्ज की दरों को अलग-अलग परिस्थितियों के आधार पर तय करता है। इसलिए RBI की दर बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि सभी बैंकों की FD दरें तुरंत और समान अनुपात में बढ़ जाएंगी।

वैश्विक तनाव और महंगाई ने बढ़ाई चिंता

RBI के फैसले के पीछे वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां भी अहम मानी जा रही हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने नई चुनौतियां खड़ी की हैं।

RBI के अनुसार, ऊर्जा और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी से दुनिया के कई हिस्सों में महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। ऐसी परिस्थितियों में केंद्रीय बैंकों के लिए आर्थिक विकास और महंगाई के बीच संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

गवर्नर ने वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता, विकसित अर्थव्यवस्थाओं में बॉन्ड यील्ड बढ़ने और डॉलर की मजबूती को भी वित्तीय बाजारों के लिए चिंता का कारण बताया। इसके अलावा वैश्विक ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी और पश्चिम एशिया के तनाव का लंबा खिंचना भी अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम के रूप में देखा जा रहा है।

शेयर बाजार की नजर भी RBI के फैसले पर

MPC के फैसले से पहले घरेलू शेयर बाजार में भी सतर्कता देखने को मिली। निवेशक यह जानना चाहते थे कि RBI महंगाई और आर्थिक विकास को लेकर किस तरह का आकलन पेश करता है।

रेपो रेट में बढ़ोतरी से बाजार में अलग-अलग सेक्टर पर अलग असर पड़ सकता है। ब्याज दरों के प्रति संवेदनशील क्षेत्रों, बैंकिंग और वित्तीय कंपनियों तथा उपभोक्ता मांग से जुड़े कारोबार पर निवेशकों की नजर बनी रह सकती है।

आम आदमी के लिए क्या समझना जरूरी है?

RBI का रेपो रेट बढ़ाने का फैसला सीधे तौर पर हर व्यक्ति की EMI बढ़ने की गारंटी नहीं है। इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि संबंधित बैंक अपनी लोन दरों में कितना बदलाव करते हैं और ग्राहक का लोन किस तरह की ब्याज दर से जुड़ा है।

फिर भी फ्लोटिंग रेट वाले कर्जदारों को आने वाले दिनों में अपने लोन की ब्याज दर और EMI पर नजर रखनी चाहिए। दूसरी ओर, बचत और FD करने वाले लोगों के लिए बैंक जमा दरों में संभावित बदलाव महत्वपूर्ण हो सकता है।

कुल मिलाकर, RBI का यह फैसला  महंगाई, वैश्विक अस्थिरता और वित्तीय परिस्थितियों  के बीच ब्याज दरों को लेकर एक अहम कदम है। आने वाले दिनों में बैंकों की ब्याज दरों में होने वाले बदलाव से इसका वास्तविक असर और स्पष्ट होगा।