भोपाल, मध्य प्रदेश: त्विषा शर्मा मौत मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने सीबीआई अदालत के समक्ष 636 पन्नों की आरोपपत्र (चार्जशीट) दाखिल की है। इसमें त्विषा के पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह को भारतीय न्याय संहिता (BNS) और दहेज प्रतिषेध अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत आरोपी बनाया गया है।
त्विषा के चचेरे भाई आशीष शर्मा ने बताया कि जांच के दौरान सीबीआई ने करीब 150 गवाहों के बयान दर्ज किए हैं। उनके अनुसार, आरोपपत्र में त्विषा के साथ कथित क्रूरता से जुड़े कई तथ्यों का उल्लेख किया गया है। उन्होंने कहा कि आरोपपत्र और उससे जुड़े दस्तावेजों की औपचारिक प्रक्रिया अभी जारी है, इसलिए मामले के सभी विवरणों पर फिलहाल स्पष्ट रूप से कुछ कहना मुश्किल है।
दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत भी कार्रवाई
आशीष शर्मा के मुताबिक, सीबीआई ने आरोपपत्र में कथित क्रूरता और दहेज प्रतिषेध अधिनियम से संबंधित प्रावधानों को शामिल किया है। उन्होंने बताया कि सीबीआई ने मामले की गहन जांच के लिए अदालत से अनुमति भी मांगी है। उनके अनुसार, कुछ पहलुओं पर सीबीआई ने तथ्य प्रस्तुत किए हैं, जबकि कुछ बिंदुओं पर आगे की जांच की आवश्यकता जताई गई है।
#BREAKING: CBI has filed a chargesheet in the Twisha Sharma case before the concerned court today. In the Twisha Sharma death case, the CBI has filed a 636-page chargesheet, alleging dowry death and demands for dowry. The chargesheet has been filed under Sections 80(2), 85, 108… pic.twitter.com/bHOJ123R49
— IANS (@ians_india) August 17, 2026
दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं
त्विषा के परिजनों ने दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट को लेकर भी सवाल उठाए हैं। आशीष शर्मा ने कहा कि उपलब्ध प्रारंभिक संक्षिप्त दस्तावेजों में दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट से संबंधित जानकारी फिलहाल दिखाई नहीं दे रही है। हालांकि, उन्होंने संभावना जताई कि यह जानकारी मुख्य दस्तावेजों में शामिल हो सकती है। उन्होंने फोन कॉल रिकॉर्ड और कथित प्रभाव डालने या मामले को प्रभावित करने के आरोपों से जुड़े कुछ पहलुओं की भी आगे जांच की आवश्यकता बताई।
परिवार ने निष्पक्ष न्याय की मांग की
त्विषा के परिवार ने न्यायिक प्रक्रिया में निष्पक्षता की मांग करते हुए कहा कि मामले में सभी आरोपियों के साथ कानून के अनुसार समान व्यवहार होना चाहिए। आशीष शर्मा ने कहा कि परिवार को उम्मीद है कि अदालत मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी तथ्यों पर विचार करेगी और कानून के अनुरूप उचित आदेश पारित करेगी। सीबीआई की ओर से दाखिल आरोपपत्र के बाद अब मामले की न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। आरोपपत्र में लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय अदालत की सुनवाई और साक्ष्यों के आधार पर होगा।
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