पश्चिम चंपारण, बिहार: नेपाल में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण बिहार में गंडक नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। पश्चिम चंपारण में बाढ़ का खतरा बढ़ने के बीच कांग्रेस विधायक सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा ने रविवार को बताया कि गंडक नदी का जल प्रवाह रात 10 बजे तक करीब 4.5 लाख क्यूसेक पहुंच सकता है।
विधायक ने बताया कि फिलहाल गंडक नदी में पानी का बहाव करीब 3 लाख क्यूसेक है। नेपाल में जारी मूसलाधार बारिश के कारण जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना शुरू कर दिया है।
निचले इलाकों से लोगों का सुरक्षित स्थानों पर पलायन
सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा के अनुसार, निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को भेरिहारी में स्थानांतरित किया जा रहा है। यहां प्रशासन के साथ स्थानीय युवा स्वयंसेवकों ने प्रभावित परिवारों के ठहरने और भोजन की व्यवस्था की है।
उन्होंने बताया कि जरूरतमंद लोगों के बीच सूखा राशन और अन्य आवश्यक सामग्री भी वितरित की जा रही है। लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन ने बाढ़ संभावित क्षेत्रों में माइक से सार्वजनिक घोषणाएं भी शुरू कर दी हैं।
#WATCH | West Champaran, Bihar | Congress MLA Surendra Prasad Kushwaha says, "Due to the torrential rainfall in Nepal, the water level of the Gandak River has risen significantly; the discharge rate is currently around 300,000 cusecs, and it is expected to reach approximately… pic.twitter.com/16AxEjlwSn
— ANI (@ANI) September 26, 2026
नेपाल में भारी बारिश के बाद अलर्ट
नेपाल में लगातार बारिश के कारण कई इलाकों में बाढ़ और जलभराव की स्थिति बन रही है। शनिवार को नेपाल के कुछ हिस्सों के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया था। खराब मौसम को देखते हुए सार्वजनिक परिवहन सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं।
नेपाल के जल विज्ञान एवं मौसम विज्ञान विभाग के मौसम पूर्वानुमान प्रभाग ने पांच दिन का विशेष मौसम चेतावनी बुलेटिन जारी कर लोगों और संबंधित एजेंसियों को सतर्क रहने को कहा है। विभाग के अनुसार, शुक्रवार रात से मंगलवार तक देश के अलग-अलग हिस्सों में हल्की से भारी बारिश और मौसम संबंधी आपदाओं की आशंका है।
काठमांडू में बागमती नदी का जलस्तर बढ़ा
नेपाल की राजधानी काठमांडू में भी लगातार बारिश के कारण बागमती नदी का जलस्तर बढ़ गया है। रिपोर्ट के अनुसार, 36 घंटे से अधिक समय तक लगातार बारिश के बाद नदी के कुछ हिस्सों में तटबंध टूट गए। नेपाल में बिगड़ते मौसम का सीधा असर बिहार की नदियों के जलस्तर पर भी पड़ रहा है। खासकर गंडक नदी के बढ़ते प्रवाह ने पश्चिम चंपारण के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
बिहार सरकार ने दीर्घकालिक बाढ़ प्रबंधन पर जोर
इसी बीच बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरुवार को कोसी नदी तंत्र से जुड़े कार्यों की समीक्षा करते हुए बाढ़ के स्थायी समाधान के लिए दीर्घकालिक रणनीति तैयार करने का निर्देश दिया।
मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, बैठक में गंगा, गंडक और कोसी नदी तंत्र से जुड़ी प्रमुख परियोजनाओं की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ प्रबंधन केवल हर साल आने वाली बाढ़ के दौरान राहत और बचाव तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि दीर्घकालिक जोखिम कम करने की रणनीति पर काम होना चाहिए।
तटबंध और नदी प्रबंधन पर विशेष जोर
कोसी नदी की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने गाद प्रबंधन और नए बैराज के निर्माण की दिशा में काम तेज करने को कहा। उन्होंने गंगा, कोसी और गंडक नदियों के व्यवस्थित प्रबंधन, दोनों किनारों पर तटबंधों को मजबूत करने और उनके ऊपर चार लेन की सड़कों के निर्माण की दिशा में कार्ययोजना तैयार करने पर जोर दिया।
गंडक नदी परियोजना की समीक्षा के दौरान तटबंधों पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने की संभावनाओं पर भी काम करने के निर्देश दिए गए।
सड़क और ऊर्जा परियोजनाओं की भी समीक्षा
मुख्यमंत्री ने बक्सर-भागलपुर 6-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे की प्रगति की भी समीक्षा की। इस परियोजना की कुल लंबाई 348.196 किलोमीटर है, जिसमें 336.205 किलोमीटर हिस्सा बिहार और करीब 12 किलोमीटर हिस्सा उत्तर प्रदेश में है।
बैठक में गंगा-अंबिका पथ, नारायणी पथ और विश्वामित्र पथ समेत अन्य सड़क परियोजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने निर्धारित समय सीमा के भीतर परियोजनाओं को पूरा करने के लिए काम तेज करने के निर्देश दिए।
ऊर्जा विभाग की समीक्षा में 2400 मेगावाट क्षमता वाली पीरपैंती ताप विद्युत परियोजना और बांका ताप विद्युत संयंत्र की स्थिति पर भी चर्चा हुई। प्रधानमंत्री कुसुम योजना के तहत कृषि फीडरों के सौर्यीकरण और सरकारी नलकूपों को सौर ऊर्जा से संचालित करने की दिशा में भी तेजी लाने के निर्देश दिए गए।
Add GTC Bharat on Google