नई दिल्ली: दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान में सह-पायलट के हमले के बावजूद यात्रियों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाने वाले कैप्टन स्मित मच्छार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बातचीत में उस भयावह घटना के दौरान के अनुभव साझा किए।
गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद कैप्टन स्मित ने बताया कि उन्हें एहसास हो गया था कि विमान नीचे जा रहा है। इसके बाद उन्होंने अपनी पूरी ताकत लगाकर कॉकपिट का दरवाजा खोलने की कोशिश की।
‘विमान नीचे जा रहा था, आखिरी कोशिश करनी थी’
प्रधानमंत्री मोदी से बातचीत के दौरान कैप्टन स्मित ने बताया कि हमले के बाद जब वह फर्श पर गिर गए थे, तब उन्हें महसूस हुआ कि विमान नीचे जा रहा है। उन्होंने कहा कि उस समय उनके मन में एक ही बात थी कि उन्हें किसी भी तरह कॉकपिट के दरवाजे तक पहुंचना है। हमले के बावजूद उन्होंने आखिरी कोशिश की और दरवाजा खोलने में सफल रहे। इसके बाद विमान में मौजूद अन्य लोगों ने भी स्थिति संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कैप्टन स्मित ने कहा कि उस वक्त वह खुद को समझा रहे थे कि वह अपनी जान बचाने के लिए ऐसा कर रहे हैं, लेकिन भीतर से उन्हें पता था कि वह यात्रियों को मरने के लिए नहीं छोड़ सकते।
#WATCH | Flydubai Captain Smit Machchhar turns emotional as he recounts his ordeal before PM Modi; he says, "You are my biggest idol. I feel proud of the way you are encouraging me today. I had so many injuries, but I told myself I have to get up and act. At the time, I told… pic.twitter.com/eqGloeCTSl
— ANI (@ANI) October 2, 2026
17 साल से उड़ा रहे हैं विमान
कैप्टन स्मित ने प्रधानमंत्री को बताया कि उन्हें विमानन क्षेत्र में काम करते हुए 17 साल हो चुके हैं और वह पिछले 11 वर्षों से कप्तान हैं। उन्होंने कहा कि लंबे अनुभव के कारण उन्हें विमान की स्थिति का अंदाजा तुरंत हो गया था और इसी वजह से वह गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद आवश्यक कदम उठा सके।
पीएम मोदी ने की साहस की तारीफ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कैप्टन स्मित के साहस, धैर्य और सूझबूझ की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि कुछ ही सेकंड में लिए गए उनके महत्वपूर्ण फैसलों ने कई लोगों की जान बचाई। प्रधानमंत्री ने कहा कि कैप्टन स्मित के साहस ने पूरे देश को गर्व महसूस कराया। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में लोगों की जान बचाने और मानव जीवन की रक्षा करने की भावना है।
मोदी ने कैप्टन स्मित से कहा कि जरूरत पड़ने पर वह उनसे कभी भी संपर्क कर सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत उनके वापस लौटने का इंतजार कर रहा है और देशभर के लोग उनके अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।
संकट के दौरान पढ़ते रहे हनुमान चालीसा
अस्पताल में इलाज करा रहे कैप्टन स्मित ने बताया कि संकट के दौरान खुद को शांत रखने के लिए वह लगातार हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जब भी उन्हें डर लगता है, उनके मन में हनुमान चालीसा आती है। उन्होंने प्रधानमंत्री को यह भी बताया कि वह अपने दो वर्षीय बेटे के साथ नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं। कैप्टन ने कहा कि विदेश में रहने के बावजूद उनके परिवार ने उन्हें अपनी संस्कृति से जोड़े रखा है।
प्रधानमंत्री से बातचीत के दौरान भावुक हुए कैप्टन
बातचीत के दौरान कैप्टन स्मित भावुक हो गए और उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वह प्रधानमंत्री से इस तरह बातचीत करेंगे। इस पर प्रधानमंत्री मोदी ने उनसे कहा कि अगर उनके सामने भी वह भावुक नहीं होंगे तो फिर कहां होंगे। कैप्टन स्मित ने अपनी रिकवरी को लेकर भरोसा जताते हुए कहा कि ठीक होने में समय लगेगा, लेकिन उन्हें पूरा विश्वास है कि वह धीरे-धीरे पूरी तरह स्वस्थ हो जाएंगे।
सऊदी अरब और यूएई की मदद के लिए जताया आभार
प्रधानमंत्री मोदी ने कैप्टन स्मित की मदद के लिए सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात की सरकारों के प्रति भी आभार व्यक्त किया। इससे पहले प्रधानमंत्री ने कैप्टन की “धैर्य, सूझबूझ और साहस” की सराहना करते हुए कहा था कि उनकी कार्रवाई ने एक बड़ी त्रासदी को टालने में मदद की।
गुजरात सरकार देगी विशेष सम्मान
घटना के बाद गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कैप्टन स्मित के साहस और सूझबूझ को देखते हुए उन्हें ‘विशिष्ट गुजरात गरिमा पुरस्कार’ देने की घोषणा की है। कैप्टन स्मित फिलहाल संयुक्त अरब अमीरात के एक अस्पताल में अपनी चोटों का इलाज करा रहे हैं। देश के कई मंदिरों में उनके जल्द स्वस्थ होने के लिए विशेष प्रार्थनाएं और धार्मिक अनुष्ठान भी किए गए हैं।
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