नई दिल्ली: चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर उठे सवालों के बीच केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेता चिराग पासवान ने कहा है कि वह सरकार का हिस्सा होने के नाते चुनाव आयोग का बचाव करने की स्थिति में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अगर निर्वाचन आयोग को लेकर सवाल उठ रहे हैं, तो आयोग की जिम्मेदारी है कि वह तथ्यों के साथ अपना पक्ष जनता के सामने रखे।

यह प्रतिक्रिया द इंडियन एक्सप्रेस की उस रिपोर्ट के बाद आई है, जिसमें चुनाव आयुक्तों के बीच कुछ फैसलों को लेकर दर्ज आपत्तियों का उल्लेख किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कई मुद्दों पर आपत्तियां दर्ज की थीं। चुनाव आयोग ने हालांकि कहा है कि अलग-अलग राय और सुझाव किसी बहुसदस्यीय संस्था की सामान्य निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा हैं और अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।

‘जनता के मन में कोई संदेह नहीं होना चाहिए’

पटना में मीडिया से बातचीत में चिराग पासवान ने कहा कि विपक्ष चुनाव आयोग को लेकर क्या आरोप लगाता है, इससे उन्हें व्यक्तिगत रूप से फर्क नहीं पड़ता। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों का काम सवाल उठाना और राजनीति करना है, लेकिन चुनाव आयोग को अपनी संस्थागत विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए जनता को भरोसे में लेना चाहिए।

चिराग ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त को विपक्ष को संतुष्ट करने के बजाय जनता के मन में किसी भी तरह का संदेह पैदा न होने देने पर ध्यान देना चाहिए। उनके मुताबिक, आयोग को अपने ऊपर उठ रहे सवालों का जवाब मजबूती से तथ्यों के साथ देना चाहिए।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह सरकार का हिस्सा होने के कारण चुनाव आयोग के पक्ष में कोई राजनीतिक बचाव नहीं करेंगे।

ECI ने रिपोर्ट के बाद क्या कहा?

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में चुनाव आयोग के भीतर SIR समेत कई फैसलों को लेकर आपत्तियों का जिक्र सामने आने के बाद आयोग ने अपनी स्थिति स्पष्ट की। ECI ने कहा कि किसी भी संस्था में चर्चा के दौरान सदस्यों के अलग-अलग विचार, सुझाव और टिप्पणियां आना सामान्य प्रक्रिया है।

चुनाव आयोग के अनुसार, अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं और सभी आधिकारिक आदेश निर्धारित कानूनी एवं संवैधानिक प्रक्रिया के तहत जारी हुए हैं। आयोग ने यह भी कहा कि उसके डिजिटल प्लेटफॉर्म और चुनावी डेटा सुरक्षा व्यवस्था निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत संचालित होते हैं।

अजय राय ने लगाए अलग आरोप

इसी मुद्दे पर उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर तीखी राजनीतिक टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार CEC ज्ञानेश कुमार को आगे बढ़ाकर चुनावी लाभ हासिल कर रही है।

अजय राय के ये आरोप राजनीतिक बयान के रूप में सामने आए हैं और इन्हें स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता। चुनाव आयोग ने अपने जवाब में कहा है कि उसके अंतिम फैसले सर्वसम्मति से हुए हैं।

रिपोर्ट के बाद बढ़ी राजनीतिक बहस

चुनाव आयोग के भीतर कथित आपत्तियों की रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने CEC ज्ञानेश कुमार की भूमिका और SIR की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। वहीं आयोग ने कहा है कि आंतरिक विचार-विमर्श में अलग-अलग राय होना किसी असहमति या अंतिम निर्णय पर विवाद का प्रमाण नहीं है।

इस पूरे विवाद के बीच चिराग पासवान की टिप्पणी महत्वपूर्ण है, क्योंकि उन्होंने सीधे आयोग का बचाव करने के बजाय उसकी ओर से जनता के सवालों का जवाब देने की जरूरत पर जोर दिया है।

फिलहाल चुनाव आयोग की आधिकारिक स्थिति यही है कि SIR समेत उसके प्रमुख फैसले सर्वसम्मति से लिए गए और प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार आगे बढ़ाई गई। दूसरी ओर, विपक्षी दल रिपोर्ट में सामने आई आपत्तियों को लेकर पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।