नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने उच्च शिक्षा विभाग के सचिव को लेकर अपने हालिया फैसले में बदलाव किया है। 23 जुलाई को जारी आदेश में नरेश पाल गंगवार को उच्च शिक्षा विभाग का सचिव बनाए जाने की घोषणा की गई थी, लेकिन अब सरकार ने उस आदेश में संशोधन करते हुए वरिष्ठ आईएएस अधिकारी दीप्ति गौर मुखर्जी को विभाग की नई सचिव नियुक्त किया है। यह बदलाव कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) की मंजूरी के बाद किया गया है।

कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के संशोधित आदेश के मुताबिक, दीप्ति गौर मुखर्जी अब उच्च शिक्षा विभाग की कमान संभालेंगी। इससे पहले वह कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय में सचिव के पद पर कार्यरत थीं। वह विनीत जोशी की जगह इस जिम्मेदारी को संभालेंगी। विनीत जोशी को पंचायती राज मंत्रालय का सचिव नियुक्त किया गया है।

23 जुलाई के फैसले में हुआ संशोधन

सरकार ने 23 जुलाई को उच्च शिक्षा विभाग के सचिव पद के लिए राजस्थान कैडर के 1994 बैच के आईएएस अधिकारी नरेश पाल गंगवार की नियुक्ति की थी। यह फैसला उस समय सामने आया था जब छात्रों का प्रदर्शन और परीक्षा से जुड़े मुद्दे चर्चा में थे।

हालांकि, नियुक्ति के बाद गंगवार उच्च शिक्षा विभाग का कार्यभार संभाल नहीं सके। इसकी वजह यह रही कि विनीत जोशी तब तक विभाग के सचिव पद पर बने हुए थे। ऐसे में सरकार के नए आदेश के बाद अब इस नियुक्ति को लेकर स्थिति स्पष्ट हो गई है।

दीप्ति गौर मुखर्जी मध्य प्रदेश कैडर की 1993 बैच की आईएएस अधिकारी हैं। उच्च शिक्षा विभाग में उनकी नियुक्ति केंद्र सरकार के प्रशासनिक स्तर पर एक महत्वपूर्ण बदलाव के तौर पर देखी जा रही है।

नरेश पाल गंगवार की नियुक्ति क्यों नहीं हो पाई?

23 जुलाई के आदेश में नरेश पाल गंगवार को उच्च शिक्षा विभाग का सचिव बनाया गया था। वहीं विनीत जोशी को पंचायती राज मंत्रालय में भेजने का फैसला किया गया था। लेकिन पदभार परिवर्तन की प्रक्रिया पूरी तरह लागू नहीं हो सकी।

विनीत जोशी को पंचायती राज मंत्रालय में उस पद का कार्यभार संभालना था, जो 31 जुलाई को सेवानिवृत्त हुए तत्कालीन सचिव विवेक भारद्वाज के बाद खाली हुआ। लेकिन जोशी के उच्च शिक्षा विभाग में बने रहने के कारण गंगवार अपने नए विभाग में कार्यभार नहीं ले सके।

अब सरकार के संशोधित आदेश के बाद उच्च शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी सीधे दीप्ति गौर मुखर्जी को सौंप दी गई है।

खीरे की खेती की सब्सिडी को लेकर चर्चा में रहे थे गंगवार

नरेश पाल गंगवार इससे पहले एक अलग मामले को लेकर भी चर्चा में रहे हैं। उनके परिवार को केंद्र सरकार की एक योजना के तहत खीरे की खेती के लिए करीब 1.16 करोड़ रुपये की सब्सिडी मिलने की जानकारी सामने आई थी। इसी वजह से उनका नाम सार्वजनिक चर्चा में आया था।

गंगवार के स्थान पर अब दीप्ति गौर मुखर्जी की नियुक्ति के साथ उच्च शिक्षा विभाग में नेतृत्व परिवर्तन हो गया है।

कई अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के तबादले और नियुक्तियां

केंद्र सरकार ने इसी प्रशासनिक फेरबदल के तहत कई अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को भी नई जिम्मेदारियां दी हैं।

मध्य प्रदेश कैडर के 1992 बैच के आईएएस अधिकारी वी. के. कांथा राव को गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग में सचिव के समकक्ष वेतनमान और रैंक के साथ विशेष कार्याधिकारी (OSD) नियुक्त किया गया है। वह अंसुली आर्या के कार्यमुक्त होने के बाद नई जिम्मेदारी संभालेंगे। फिलहाल कांथा राव जल शक्ति मंत्रालय के जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग के सचिव हैं।

वहीं असम-मेघालय कैडर की 1995 बैच की आईएएस अधिकारी अर्चना वर्मा अब जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग की सचिव होंगी। वह कांथा राव की जगह लेंगी।

इसके अलावा युवा कार्यक्रम विभाग की सचिव पल्लवी जैन गोविल को कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय का नया सचिव नियुक्त किया गया है। ओडिशा कैडर के 1995 बैच के आईएएस अधिकारी सुशील कुमार लोहानी को भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) का अध्यक्ष बनाया गया है।

छात्रों के प्रदर्शन के बीच हुआ था पिछला बदलाव

उच्च शिक्षा विभाग में यह प्रशासनिक बदलाव ऐसे समय हुआ है जब छात्रों के प्रदर्शन और परीक्षाओं से जुड़े मुद्दे राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में हैं। 23 जुलाई को नरेश पाल गंगवार की नियुक्ति भी छात्र प्रदर्शनों के बीच हुई थी। सरकार की ओर से परीक्षा से जुड़े मामलों में फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने की बात भी सामने आई थी।

अब दीप्ति गौर मुखर्जी को उच्च शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी मिलने के बाद शिक्षा प्रशासन से जुड़े मुद्दों और लंबित मामलों पर उनकी भूमिका पर नजर रहेगी।