संसद के मॉनसून सत्र में लगातार जारी गतिरोध के बीच केंद्र सरकार अब विपक्ष के साथ संवाद बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है। सरकार का लक्ष्य लंबित महत्वपूर्ण विधेयकों को आगे बढ़ाना है, जिनमें परिसीमन विधेयक सबसे अहम माना जा रहा है। इसी सिलसिले में संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने एक बार फिर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मुलाकात की। यह मौजूदा सत्र के दौरान दोनों नेताओं के बीच तीसरी महत्वपूर्ण बातचीत बताई जा रही है।
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, सरकार विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस का समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रही है ताकि संविधान संशोधन से जुड़े इस महत्वपूर्ण विधेयक को संसद में पर्याप्त समर्थन मिल सके।
राहुल गांधी ने सहयोगियों से चर्चा की बात कही
बैठक के दौरान परिसीमन विधेयक प्रमुख चर्चा का विषय रहा। सूत्रों के मुताबिक, किरेन रिजिजू ने कांग्रेस से विधेयक के समर्थन का आग्रह किया। हालांकि राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर कांग्रेस अकेले निर्णय नहीं लेगी।
उन्होंने कहा कि इंडिया गठबंधन में शामिल सहयोगी दलों से विस्तृत चर्चा के बाद ही पार्टी अपना अंतिम रुख तय करेगी। कांग्रेस का मानना है कि इतने महत्वपूर्ण संवैधानिक बदलाव पर सभी सहयोगी दलों की राय लेना जरूरी है।
सरकार ने कई दलों से बढ़ाया संपर्क
सरकार केवल कांग्रेस तक ही सीमित नहीं है, बल्कि विभिन्न विपक्षी दलों के साथ भी लगातार संपर्क बनाए हुए है। सूत्रों के अनुसार समाजवादी पार्टी, डीएमके, एनसीपी (शरद पवार गुट) समेत कई दलों से इस विषय पर बातचीत चल रही है।
बताया जा रहा है कि दक्षिण भारत के कुछ दलों ने विशेष रूप से राज्यों के प्रतिनिधित्व और सीटों के संतुलन को लेकर अपनी चिंताएं सरकार के सामने रखी हैं। सरकार इन आशंकाओं को दूर करने के लिए राजनीतिक स्तर पर संवाद जारी रखे हुए है।
मॉनसून सत्र में समय कम, सरकार के सामने चुनौती
मॉनसून सत्र अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है और सरकार के पास सीमित समय बचा है। ऐसे में यदि विपक्ष का सहयोग नहीं मिलता, तो विधेयक को पारित कराना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
सरकार चाहती है कि संसद में गतिरोध समाप्त हो और महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा के बाद मतदान कराया जाए। विपक्ष का कहना है कि पहले सदन में लंबित राजनीतिक और जनहित के मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए।
क्या है परिसीमन विधेयक?
परिसीमन विधेयक का उद्देश्य लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की नई जनसंख्या के आधार पर सीटों का पुनर्निर्धारण करना है। प्रस्तावित विधेयक में लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रावधान शामिल है।
इसके साथ ही महिला आरक्षण को प्रभावी रूप से लागू करने का रास्ता भी इसी प्रक्रिया से जुड़ा माना जा रहा है। विधेयक संविधान संशोधन से संबंधित है, इसलिए इसे संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत से पारित कराना आवश्यक होगा।
पहले भी नहीं मिल पाया था पर्याप्त समर्थन
बजट सत्र के दौरान भी सरकार ने इस विधेयक को आगे बढ़ाने की कोशिश की थी, लेकिन विपक्ष के विरोध के चलते इसे पर्याप्त समर्थन नहीं मिल सका। अब बदले हुए राजनीतिक समीकरणों के बीच सरकार दोबारा समर्थन जुटाने में लगी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सरकार प्रमुख विपक्षी दलों की आशंकाओं का समाधान करने में सफल रहती है, तो विधेयक पर व्यापक सहमति बनने की संभावना बढ़ सकती है।
अगले कुछ दिन होंगे अहम
फिलहाल सरकार और विपक्ष दोनों अपने-अपने स्तर पर रणनीति बनाने में जुटे हैं। राहुल गांधी और किरेन रिजिजू की लगातार हो रही मुलाकातें इस बात का संकेत हैं कि गतिरोध खत्म करने और महत्वपूर्ण विधेयकों पर सहमति बनाने की कोशिशें जारी हैं।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि इंडिया गठबंधन की आंतरिक चर्चा के बाद कांग्रेस क्या रुख अपनाती है और क्या संसद के मौजूदा सत्र में परिसीमन विधेयक पर आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो पाता है।
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