रांची: झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार उग्र होता जा रहा है। राजधानी रांची में कई दिनों से चल रहे धरने ने अब भूख हड़ताल का रूप ले लिया है। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो के साथ चार अन्य अभ्यर्थी भी आमरण अनशन पर बैठे हैं। आंदोलनकारी परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, कथित धांधली की निष्पक्ष जांच और विवादित परीक्षा रद्द करने की मांग पर अडिग हैं।

आंदोलन के बीच देवेंद्र महतो की तबीयत बिगड़ने की खबरों ने चिंता बढ़ा दी। स्वास्थ्य खराब होने और समर्थकों की अपील के बाद उन्होंने पानी तो ग्रहण किया, लेकिन साफ कर दिया कि उनका आंदोलन तब तक समाप्त नहीं होगा, जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती।

कौन हैं भूख हड़ताल पर बैठे पांच अभ्यर्थी?

इस आंदोलन का नेतृत्व छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो कर रहे हैं। उन्होंने सबसे पहले अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी। उनकी प्रमुख मांग 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा को रद्द कर पूरे मामले की CBI जांच कराने की है।

उनके साथ राहुल क्रांति कुमार भी अनशन पर बैठे हैं। लंबे समय से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे राहुल का कहना है कि वर्षों की मेहनत के बावजूद उन्हें न्याय नहीं मिला। उनका आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया की कथित अनियमितताओं ने हजारों युवाओं का भविष्य प्रभावित किया है।

रांची की रहने वाली हबीबा भी आंदोलन का हिस्सा हैं। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बावजूद सरकार की ओर से कोई ठोस पहल नहीं हुई, इसलिए उन्होंने भूख हड़ताल का रास्ता चुना।

इसी तरह रूपेश और सविता कुमारी भी इस आंदोलन में शामिल हैं। दोनों का कहना है कि लगातार सामने आ रहे विवादों ने प्रतियोगी परीक्षाओं पर युवाओं का भरोसा कमजोर कर दिया है और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।

'लड़ाई किसी सरकार से नहीं, व्यवस्था से है'

अनशन पर बैठे अभ्यर्थियों का कहना है कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध के लिए नहीं है। उनका दावा है कि यह संघर्ष केवल भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और युवाओं के भविष्य की सुरक्षा के लिए है।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना है कि योग्य उम्मीदवारों को निष्पक्ष अवसर मिले और परीक्षा प्रणाली पर लोगों का विश्वास दोबारा कायम हो।

आंदोलन का असर, बढ़ा प्रशासन पर दबाव

छात्र आंदोलन के बीच प्रशासनिक स्तर पर भी हलचल तेज हुई है। भर्ती विवाद की जांच कर रही एजेंसियों ने कई लोगों को हिरासत में लिया है, जबकि इस पूरे मामले में JPSC अध्यक्ष के इस्तीफे के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।

हालांकि आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि केवल गिरफ्तारियां पर्याप्त नहीं हैं। उनका कहना है कि जब तक परीक्षा प्रक्रिया की व्यापक जांच, जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई और उनकी मांगों पर लिखित आश्वासन नहीं मिलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

सोनम वांगचुक से वीडियो कॉल, रांची आने का न्योता

आंदोलन के दौरान छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो की सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से वीडियो कॉल पर बातचीत भी हुई। बताया गया कि बातचीत के दौरान वांगचुक ने उनकी सेहत की चिंता जताई और लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन जारी रखने की सलाह दी।

इसी बातचीत के दौरान उनके आग्रह पर देवेंद्र महतो ने पानी ग्रहण किया। इसके साथ ही उन्होंने सोनम वांगचुक से रांची आकर आंदोलनरत छात्रों का मनोबल बढ़ाने का आग्रह भी किया।

अब सरकार के फैसले का इंतजार

झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन अब राज्यव्यापी चर्चा का विषय बन चुका है। छात्र संगठन लगातार परीक्षा रद्द करने, निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

अब सभी की नजर सरकार और जांच एजेंसियों के अगले कदम पर टिकी है। यदि जल्द समाधान नहीं निकलता, तो यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।