नई दिल्ली: चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) को लेकर देश में राजनीतिक बहस लगातार तेज होती जा रही है। इसी बीच कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने पार्टी का रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े कुछ अहम मुद्दों पर कांग्रेस पीछे हटने के लिए तैयार नहीं है।
खड़गे के मुताबिक कांग्रेस की प्रमुख मांगों में SIR की प्रक्रिया को वापस लेना, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाना और EVM की जगह बैलेट पेपर से चुनाव कराना शामिल है। पार्टी का कहना है कि इन मुद्दों का सीधा संबंध चुनावी प्रक्रिया में जनता के भरोसे और पारदर्शिता से है।
कांग्रेस ने इन मांगों को विपक्षी INDIA गठबंधन की बैठकों में भी प्रमुखता से उठाया है। विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची में किए जा रहे बदलावों को लेकर अपनी चिंताएं सार्वजनिक की हैं।
SIR को लेकर क्या है कांग्रेस की आपत्ति?
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत मतदाताओं के रिकॉर्ड का दोबारा सत्यापन और जांच की जाती है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और उसमें मौजूद गलत, डुप्लीकेट, मृत या अपात्र नामों की पहचान करना है।
कांग्रेस हालांकि इस प्रक्रिया के तरीके और उसके संभावित प्रभाव को लेकर सवाल उठा रही है। पार्टी का तर्क है कि दस्तावेजों और सत्यापन की अतिरिक्त प्रक्रिया के कारण ऐसे लोगों के नाम भी प्रभावित हो सकते हैं, जो वास्तव में मतदान के पात्र हैं।
कांग्रेस ने मांग की है कि SIR को वापस लिया जाए और जहां आवश्यक हो, वहां प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी तरीके से लागू किया जाए। पार्टी ने मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने या संशोधन से संबंधित जानकारी को स्थानीय स्तर पर अधिक स्पष्ट रूप से उपलब्ध कराने की भी बात कही है।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची का नियमित पुनरीक्षण लोकतांत्रिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। आयोग के अनुसार इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक और विश्वसनीय बनाना है।
मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर भी कांग्रेस सख्त
कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। पार्टी का आरोप है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और कुछ चुनावी फैसलों को लेकर पर्याप्त पारदर्शिता नहीं है।
कांग्रेस चाहती है कि मुख्य चुनाव आयुक्त अपने पद से हटें। विपक्षी दल चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया और चुनाव आयुक्तों के बीच फैसलों को लेकर भी सार्वजनिक रूप से अधिक जानकारी उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं।
हालांकि, इन राजनीतिक आरोपों पर चुनाव आयोग का अपना पक्ष है और आयोग ने विभिन्न मौकों पर अपनी प्रक्रियाओं को नियमों के तहत संचालित होने की बात कही है। ऐसे में इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों और संवैधानिक संस्था के बीच मतभेद बने हुए हैं।
EVM पर कांग्रेस का रुख
कांग्रेस ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी EVM को लेकर भी अपना रुख स्पष्ट किया है। पार्टी की मांग है कि चुनाव में दोबारा बैलेट पेपर से मतदान कराने की व्यवस्था पर विचार किया जाए।
कांग्रेस का कहना है कि मतदान प्रणाली को लेकर मतदाताओं का भरोसा सर्वोच्च प्राथमिकता होना चाहिए। पार्टी का मानना है कि बैलेट पेपर से मतदान कराने से चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठ रहे संदेह कम किए जा सकते हैं।
वहीं चुनाव आयोग और बीजेपी लंबे समय से EVM की विश्वसनीयता का बचाव करते रहे हैं। उनका तर्क है कि EVM से जुड़ी सुरक्षा और जांच की निर्धारित प्रक्रियाएं मौजूद हैं और चुनाव परिणामों पर सवाल उठाने के लिए ठोस प्रमाण जरूरी हैं।
INDIA गठबंधन भी आंदोलन की तैयारी में
इन मुद्दों को लेकर INDIA गठबंधन ने देशभर में राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित करने का फैसला किया है। विपक्षी दल चुनाव आयोग की भूमिका, SIR और मतदान व्यवस्था को लेकर अपनी मांगों को जनता तक पहुंचाने की तैयारी में हैं।
आने वाले दिनों में यह विवाद और तेज होने की संभावना है, क्योंकि एक तरफ विपक्ष चुनावी प्रक्रिया में बदलाव और अधिक पारदर्शिता की मांग कर रहा है, जबकि चुनाव आयोग मतदाता सूची के पुनरीक्षण को चुनाव प्रक्रिया का आवश्यक हिस्सा बता रहा है।
फिलहाल कांग्रेस ने अपने तीन प्रमुख मुद्दों पर समझौते की संभावना से इनकार किया है। ऐसे में SIR, EVM और चुनाव आयोग की भूमिका आने वाले समय में देश की राजनीति में महत्वपूर्ण मुद्दे बने रह सकते हैं।
Add GTC Bharat on Google