नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने गुरुवार को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राज्य की राजनीति, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल उठाए। इस दौरान उन्होंने दावा किया कि लोगों को 2029 तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा और जल्द ही “गुड न्यूज” मिलेगी। हालांकि, उन्होंने इस बयान के संदर्भ में किसी निश्चित तारीख या संभावित राजनीतिक घटनाक्रम की जानकारी नहीं दी।

ममता बनर्जी का यह बयान ऐसे समय आया है जब चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची के पुनरीक्षण और SIR को लेकर विपक्षी दलों की आपत्तियां लगातार सामने आ रही हैं। INDIA गठबंधन के नेताओं ने भी हाल में चुनाव आयोग और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर संयुक्त अभियान की घोषणा की है।

SIR को लेकर ममता ने फिर उठाए सवाल

प्रेस कॉन्फ्रेंस में ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में चलाए गए SIR को लेकर अपनी पार्टी की आपत्तियां दोहराईं। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस ने शुरुआत से ही इस प्रक्रिया का विरोध किया था। उनका आरोप है कि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया का असर उन इलाकों में अधिक दिखाई दिया जहां उनकी पार्टी को पहले चुनावों में समर्थन मिला था।

ममता ने दावा किया कि जिन विधानसभा क्षेत्रों में तृणमूल कांग्रेस को बढ़त मिली थी, वहां अपेक्षाकृत अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए। यह उनका राजनीतिक दावा है, जिसकी व्यापक स्वतंत्र पुष्टि के लिए निर्वाचन क्षेत्रवार आधिकारिक आंकड़ों और हटाए गए नामों की श्रेणियों का विश्लेषण जरूरी है।

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची को लेकर विवाद पहले भी सामने आया है। चुनाव आयोग की ओर से SIR का उद्देश्य मतदाता सूची की शुद्धता और उसमें मौजूद गलत, मृत या डुप्लिकेट प्रविष्टियों की पहचान करना बताया गया है। दूसरी ओर, विपक्षी दलों ने प्रक्रिया, नाम हटाए जाने और मतदाताओं को उपलब्ध सुधार एवं अपील की व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं।

ज्ञानेश कुमार पर ममता की टिप्पणी

ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी निशाना साधा। उन्होंने उन्हें “वैनिश कुमार” कहकर संबोधित किया और आरोप लगाया कि मतदाता अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर चुनाव आयोग की भूमिका संतोषजनक नहीं रही।

हालांकि, ये ममता बनर्जी द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं। चुनाव आयोग ने मतदाता सूची से जुड़े अपने कार्यों को कानून और निर्धारित प्रक्रियाओं के तहत किए जाने की बात कही है। हाल के विवाद के बीच आयोग ने मतदाता सूची से जुड़े सॉफ्टवेयर और प्रक्रियाओं की समीक्षा के लिए भी कदम उठाए हैं।

ममता ने कहा कि उनकी पार्टी ने SIR से जुड़े मामलों को लेकर अदालत का रुख किया और चुनाव आयोग के सामने भी प्रभावित लोगों की समस्याएं उठाईं। उन्होंने दावा किया कि पार्टी के प्रतिनिधियों को आयोग से अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिली।

चुनाव आयुक्तों को मिले कानूनी संरक्षण पर सवाल

प्रेस कॉन्फ्रेंस में ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों को मिले कानूनी संरक्षण का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने सवाल किया कि यदि किसी संवैधानिक संस्था के अधिकारी को आधिकारिक कार्यों के लिए कानूनी सुरक्षा प्राप्त है, तो ऐसी स्थिति में जवाबदेही किस तरह सुनिश्चित होगी।

यह विवाद 2023 में बने उस कानूनी प्रावधान से जुड़ा है जिसके तहत मौजूदा या पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों के खिलाफ उनके आधिकारिक कर्तव्यों के दौरान किए गए कार्यों, शब्दों या निर्णयों को लेकर कुछ परिस्थितियों में दीवानी या आपराधिक कार्यवाही से संरक्षण दिया गया है।

ममता का सवाल मुख्य रूप से इसी सुरक्षा और जवाबदेही के बीच संतुलन को लेकर था। विपक्षी दल इस प्रावधान को लेकर पहले भी सवाल उठा चुके हैं।

‘2029 तक इंतजार नहीं करना होगा’ बयान से बढ़ी चर्चा

ममता बनर्जी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि लोगों को 2029 तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा और जल्द “गुड न्यूज” मिलेगी। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में इसकी अलग-अलग व्याख्याएं शुरू हो गईं।

हालांकि, ममता ने यह स्पष्ट नहीं किया कि उनका इशारा किसी चुनाव, सरकार में बदलाव या किसी अन्य राजनीतिक घटनाक्रम की ओर था। इसलिए फिलहाल इस बयान को उनके राजनीतिक वक्तव्य के रूप में ही देखा जा सकता है और इससे किसी निश्चित भविष्य के घटनाक्रम का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

पश्चिम बंगाल में SIR बना बड़ा राजनीतिक मुद्दा

मतदाता सूची का SIR पश्चिम बंगाल की राजनीति में प्रमुख मुद्दा बन चुका है। तृणमूल कांग्रेस इसे मतदाताओं के अधिकार और चुनावी प्रक्रिया से जोड़कर सवाल उठा रही है। वहीं बीजेपी और उसके नेताओं ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए चुनाव आयोग की प्रक्रिया का बचाव किया है।

बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी ने हाल में मतदाता नाम हटाए जाने के लिए ममता बनर्जी को जिम्मेदार ठहराने का दावा किया था और कहा था कि नाम हटाने की प्रक्रिया न्यायिक अधिकारियों के माध्यम से हुई। यह बीजेपी का राजनीतिक पक्ष है और इसे ममता बनर्जी के आरोपों से अलग समझना जरूरी है।

इस बीच, चुनाव आयोग से जुड़े विवाद पर विपक्षी INDIA गठबंधन ने भी देशव्यापी राजनीतिक कार्यक्रमों की घोषणा की है। गठबंधन ने SIR से पहले की मतदाता सूचियों, चुनाव प्रक्रिया और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर कई मांगें रखी हैं।

आगे भी जारी रह सकता है राजनीतिक विवाद

ममता बनर्जी के ताजा बयान से साफ है कि SIR और मतदाता सूची का मुद्दा आने वाले दिनों में भी पश्चिम बंगाल और राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बना रहेगा। एक तरफ विपक्ष चुनाव आयोग की प्रक्रिया और जवाबदेही पर सवाल उठा रहा है, वहीं बीजेपी और चुनाव आयोग इन आरोपों को स्वीकार नहीं करते।

ऐसे में आगे की स्थिति आधिकारिक मतदाता सूची, आपत्तियों और अपीलों पर होने वाली कार्रवाई तथा संबंधित न्यायिक प्रक्रियाओं से भी तय होगी। फिलहाल ममता बनर्जी के “2029 तक इंतजार नहीं” और “गुड न्यूज” वाले बयान ने राजनीतिक चर्चा जरूर तेज कर दी है, लेकिन इसके पीछे किसी निश्चित घटनाक्रम की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।