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नीतीश कुमार ने MLC पद से दिया इस्तीफा, राज्यसभा जाने की राह साफ...

By: GTC Bharat Desk  |  Edited By: Preeti Kamal  |  Updated at: March 30th 2026 11:29 AM

नीतीश कुमार ने MLC पद से दिया इस्तीफा, राज्यसभा जाने की राह साफ...
नीतीश कुमार ने MLC पद से दिया इस्तीफा, राज्यसभा जाने की राह साफ...

बिहार: बिहार के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे नीतीश ने बिहार विधान परिषद (MLC) की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। पटना में यह महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया, जहां जनता दल (यूनाइटेड) के प्रमुख नितीश कुमार ने इस महीने की शुरुआत में राज्यसभा के लिए चुने जाने के बाद राज्य विधानमंडल से इस्तीफा दे दिया। यह कदम उनके राजनीतिक संक्रमण (ट्रांजिशन) का हिस्सा माना जा रहा है।

5 मार्च को 75 वर्षीय नितीश कुमार ने एक भावुक संदेश लिखकर अपने फैसले की घोषणा की थी। उन्होंने बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों और संसद के दोनों सदनों का सदस्य बनने की अपनी इच्छा व्यक्त की थी। साथ ही उन्होंने "विकसित बिहार" के निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और नई सरकार को अपना "सहयोग और मार्गदर्शन" देने की बात कही।

1985 में विधायक के रूप में शुरू किया था राजनीतिक सफर

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने नीतीश कुमार के फैसले का स्वागत किया और संसदीय लोकतंत्र में उनकी वापसी की सराहना की। एक सप्ताह पहले ही नितीश कुमार को सर्वसम्मति से जनता दल (यूनाइटेड) का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया था, क्योंकि इस पद के लिए किसी अन्य उम्मीदवार ने नामांकन दाखिल नहीं किया था।

नितीश कुमार का राजनीतिक करियर गठबंधन राजनीति का बेहतरीन उदाहरण रहा है, जिसमें कई बड़े वैचारिक बदलाव शामिल रहे हैं। 1985 में विधायक के रूप में अपने सफर की शुरुआत करने के बाद उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में केंद्रीय मंत्री के रूप में भी काम किया। वर्ष 2005 में वे पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री बने।

2025 में दसवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली

2013 के बाद से उनकी राजनीति "गठबंधन बदलाव" के लिए जानी जाती रही है, जहां उन्होंने बीजेपी और महागठबंधन (राजद और कांग्रेस) के बीच 2013, 2017, 2022 और 2024 में कई बार गठबंधन बदला। इसके बावजूद उनकी राजनीतिक पकड़ मजबूत बनी रही और 2025 में उन्होंने पांचवीं बार बड़ी जीत हासिल करते हुए रिकॉर्ड दसवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। अब राज्यसभा में उनका जाना बिहार की राजनीति को नया मोड़ दे सकता है। इससे राज्य में बीजेपी का प्रभाव बढ़ सकता है और पटना में नए नेतृत्व के उभरने की संभावना बन सकती है।