अयोध्या: अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे की रकम में कथित गबन के मामले में पुलिस ने आठ आरोपियों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी है। जांच में CCTV फुटेज, मोबाइल चैट, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, बैंकिंग लेनदेन और बरामदगी को अहम साक्ष्य बनाया गया है। पुलिस का दावा है कि गणना कक्ष में चढ़ावे की रकम हटाने और उसे छिपाने की घटनाएं कैमरों में रिकॉर्ड हुईं। मामले में कुल 133 गवाह बनाए गए हैं।

हालांकि, इस पूरे मामले में आरोप अभी न्यायिक परीक्षण के अधीन हैं। चार्जशीट में दर्ज पुलिस के दावे और बरामदगी को अदालत में साक्ष्यों के आधार पर परखा जाएगा। आरोपियों की दोषसिद्धि अभी नहीं हुई है।

90 दिन की जांच के बाद दाखिल हुई चार्जशीट

राम जन्मभूमि थाना क्षेत्र में दर्ज मुकदमे की जांच पूरी करने के बाद पुलिस की विशेष जांच टीम ने आठ आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट अदालत में दाखिल की। रिपोर्टों के मुताबिक, चार्जशीट हजारों पन्नों में है और इसे अदालत में स्वीकार भी किया गया है। भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं।

मामले में नामजद आठ आरोपी हैं—अविनाश शुक्ला उर्फ शनि, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, करुणेश पाण्डेय, रमाशंकर मिश्रा, मनीष कुमार यादव, रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू और सुभाष श्रीवास्तव।

पुलिस के मुताबिक, इन सभी की भूमिका अलग-अलग स्तर पर जांच के दायरे में रही। इनमें ज्यादातर लोग चढ़ावे की रकम की गिनती से जुड़े काम में थे, जबकि सुभाष श्रीवास्तव गणना व्यवस्था से जुड़े प्रभारी बताए गए हैं। रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के बारे में भी चार्जशीट में मंदिर की आंतरिक व्यवस्था और गणना कक्ष तक उसकी पहुंच का उल्लेख किया गया है।

CCTV में दर्ज हुईं रकम हटाने की घटनाएं

जांच का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा गणना कक्ष में लगे CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग बताई जा रही है। पुलिस के अनुसार, फुटेज की जांच के दौरान कई ऐसे मौके मिले, जब चढ़ावे में आई नकदी को हटाने या दूसरे आरोपियों की मदद करने की घटनाएं कैमरे में रिकॉर्ड हुईं।

चार्जशीट में पुलिस ने दावा किया है कि अविनाश शुक्ला 85 बार रकम हटाते या उसे कपड़ों तथा कमर में छिपाते हुए दिखाई दिया। इसके अलावा चार मौकों पर उसके द्वारा अन्य आरोपियों की मदद किए जाने की बात कही गई है।

इसी तरह करुणेश पाण्डेय पर दो बार रकम हटाने और 68 बार कथित तौर पर सह-आरोपियों की मदद करने का आरोप है। अनुकल्प मिश्रा के बारे में 56 बार सहयोग करने का दावा किया गया है।

लवकुश मिश्रा पर एक बार रकम हटाने और 52 बार मदद करने, जबकि मनीष कुमार यादव पर 16 बार रकम हटाने और 19 बार सहयोग करने का आरोप लगाया गया है। रमाशंकर मिश्रा भी एक बार रकम हटाते हुए CCTV फुटेज में दिखाई देने का दावा चार्जशीट में किया गया है।

SIT की पहले की जांच में भी CCTV से कई संदिग्ध घटनाओं का पता चलने की बात सामने आई थी। सितंबर में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से रखी गई रिपोर्ट के अनुसार, मंदिर परिसर के CCTV में कथित अनधिकृत तरीके से नकदी हटाने के 105 उदाहरण दर्ज किए गए थे।

बाथरूम में मिली 2.25 लाख रुपये की गड्डियां

मामले की जांच में सामने आए घटनाक्रम में 4 जून की रात का एक CCTV फुटेज खास तौर पर महत्वपूर्ण बताया गया है। पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक, गणना कक्ष से जुड़े कर्मचारियों को संदेह होने और गेट पर जांच शुरू होने के बाद कथित तौर पर कुछ रकम बाथरूम में छिपा दी गई।

रिपोर्ट के अनुसार, करीब ₹2.25 लाख की नकदी की गड्डियां बाथरूम से मिलीं। गणना कर्मी आनंद कुमार चौधरी ने कथित तौर पर इसका वीडियो तत्कालीन ट्रस्ट महासचिव चंपत राय को भेजा था।

इसके बाद गणना कक्ष और कारसेवकपुरम में लगे CCTV फुटेज की जांच शुरू हुई। पुलिस का कहना है कि इसी जांच से रकम हटाने की कथित घटनाओं की कड़ियां सामने आईं। 25 जून को इस मामले में FIR दर्ज की गई थी।

आरोपियों से लाखों रुपये, डॉलर और गहने बरामद

चार्जशीट में पुलिस ने नकदी और दूसरी संपत्तियों की बरामदगी को भी अहम साक्ष्य के तौर पर शामिल किया है। पुलिस के मुताबिक, सात आरोपियों से कुल करीब ₹79.8 लाख बरामद किए गए।

अविनाश शुक्ला के पास से करीब ₹20.39 लाख नकद, 1,121 अमेरिकी डॉलर और सोने-चांदी के सामान की बरामदगी बताई गई है। यह मामले में बताई गई प्रमुख नकद बरामदगियों में से एक है।

पुलिस के अनुसार अन्य आरोपियों से भी लाखों रुपये बरामद किए गए। लवकुश मिश्रा से ₹14.25 लाख, रमाशंकर मिश्रा से ₹7.32 लाख और अन्य आरोपियों से भी नकदी मिलने की बात चार्जशीट में कही गई है।

जांच में वाहनों को लेकर भी पुलिस ने कार्रवाई की। रिपोर्ट के मुताबिक, अविनाश शुक्ला से ब्रेजा, अनुकल्प मिश्रा से डिजायर और रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू से अर्टिगा तथा बाइक बरामद किए जाने का उल्लेख है।

चोरी की रकम से संपत्ति खरीदने का आरोप

पुलिस ने केवल नकदी बरामदगी तक जांच सीमित नहीं रखी। चार्जशीट में कथित तौर पर यह भी दर्ज किया गया है कि आरोपियों ने रकम का इस्तेमाल जमीन, मकान, वाहन और दूसरी संपत्तियों पर किया।

अनुकल्प मिश्रा के संबंध में पुलिस ने एक मकान की खरीद और निर्माणाधीन मकान पर खर्च का उल्लेख किया है। इसी तरह लवकुश मिश्रा पर पत्नी के नाम जमीन खरीदने और मकान निर्माण में रकम लगाने का आरोप है।

रमाशंकर मिश्रा के संबंध में प्लॉट खरीदने तथा महंगे कैमरे और सोने की अंगूठियां लेने की बात जांच में सामने आने का दावा किया गया है। रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू पर बेटे के नाम संपत्ति खरीदने का आरोप है।

अनुकल्प मिश्रा द्वारा करीब ₹55 लाख के मकान की खरीद में कथित तौर पर नकद रकम इस्तेमाल करने की बात भी चार्जशीट में बताई गई है। पुलिस ने इन संपत्तियों और खर्चों को कथित अपराध से जुड़ी रकम के इस्तेमाल की कड़ी के रूप में जांचा है।

पहले की जांच में भी पुलिस ने आरोप लगाया था कि अविनाश शुक्ला ने कथित तौर पर रकम का एक हिस्सा परिवार और दोस्तों पर खर्च किया तथा उसके पास नकदी, विदेशी मुद्रा और वाहन मिले।

WhatsApp चैट और CDR भी जांच का हिस्सा

पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल फोन, WhatsApp चैट और Call Detail Records को भी केस डायरी का हिस्सा बनाया है। चार्जशीट के अनुसार, डिजिटल साक्ष्यों से आरोपियों के बीच लगातार संपर्क और कथित तौर पर रकम के लेनदेन, छिपाने तथा उसे दूसरी जगह ले जाने से जुड़ी बातचीत की जानकारी मिलने का दावा किया गया है।

इसके साथ ही बैंक खातों और पैसों के संभावित इस्तेमाल की भी जांच की गई। पुलिस ने कथित तौर पर अपराध से अर्जित रकम को अलग-अलग संपत्तियों और खरीदारी से जोड़ने की कोशिश की है।

इस तरह जांच में चार प्रमुख कड़ियां बनाई गईं—CCTV फुटेज, डिजिटल बातचीत, बरामद नकदी/सामान और कथित तौर पर खरीदी गई संपत्तियां।

133 गवाहों के बयान भी चार्जशीट में

पुलिस ने मामले में कुल 133 गवाह बनाए हैं। इनमें शिकायतकर्ता कृष्णमोहन, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा, गोपाल राव, बैंक कर्मचारी, सुरक्षा कर्मी और फॉरेंसिक ऑडिटर सहित अन्य लोग शामिल हैं।

महत्वपूर्ण बात यह है कि चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव को इस मामले में आरोपी नहीं बल्कि गवाह बनाया गया है। पुलिस ने मंदिर की व्यवस्था, चढ़ावे की गणना और संबंधित प्रक्रियाओं को लेकर उनके बयान जांच में शामिल किए हैं।

वहीं, SIT की जांच में चांदी की ईंटों और कुछ अन्य मूल्यवान दान सामग्री को लेकर अलग से भी जांच हुई। सुप्रीम कोर्ट में रखी गई रिपोर्ट के अनुसार, करीब 200 किलोग्राम और अन्य चांदी की ईंटों सहित कुछ मूल्यवान दान सामग्री के मामले में कोई विसंगति नहीं मिली।

अब अदालत में होगी साक्ष्यों की जांच

चार्जशीट दाखिल होने के बाद मामले का अगला चरण न्यायिक प्रक्रिया है। पुलिस ने CCTV, डिजिटल डेटा, बरामदगी, गवाहों के बयान और संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों को अपने आरोपों का आधार बनाया है। अब इन साक्ष्यों की वैधता और आरोपों की पुष्टि अदालत में होने वाली सुनवाई के दौरान होगी।

इस मामले में आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल होना जांच एजेंसी की कार्रवाई का अगला चरण है, लेकिन चार्जशीट में लगाए गए आरोप अपने आप में दोषसिद्धि नहीं होते। अदालत में अभियोजन पक्ष को अपने आरोप साक्ष्यों के आधार पर साबित करने होंगे और आरोपियों को अपना पक्ष रखने का पूरा अधिकार है।