दिल्ली: चुनाव आयोग की वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेसिव रिवीजन (SIR) से जुड़े नए मतदाताओं द्वारा भरे जाने वाले 'फॉर्म-6' में किए गए बदलावों को लेकर स्थिति लगातार विवादों में घिरती जा रही है। बीते सोमवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की टिप्पणी ने इस विवाद को और गहरा दिया है जिसमें उन्होंने कहा था कि फॉर्म-6 में किए गए किसी भी बदलाव को मंज़ूरी नहीं दी गई थी।
CJI ने यह इशारा किया था कि चुनाव आयोग से रिपोर्ट मिलने के बाद कोर्ट इस बात की तह तक जाँच करेगा कि ये बदलाव किसने किये थे। मुख्य न्यायाधीश का यह बयान उस वक्त सामने आया जब CJI की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के खिलाफ दर्ज याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।
शशि थरूर ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखी कविता
फॉर्म-6 में बदलाव को लेकर जहाँ हर तरफ रोष है वहीं, कांग्रेस सांसद डॉ शशि थरूर ने सोशल मीडिया एक्स पर एक कविता के माध्यम से सारा हाल कह डाला और साथ ही यह सवाल भी पूछा कि आखिर यह बदलाव किसके इशारे पर किए गए थे ? आखिर किसके आदेश पर फॉर्म-6 में यह बदलाव किए गए?
केरल के तिरुवनंतपुरम से सांसद डॉ. शशि थरूर ने अपनी पोस्ट में अपनी कविता के माध्यम से न सिर्फ वर्तमान स्थिति पर सवाल किए बल्कि सियासत में चल रही हलचल की स्थिति को भी तंज की शक्ल में लिखा कि आखिर इन सबके पीछे कौन है खिलाड़ी और कौन बना है मोहरा ?
“जो तुमने आँख मूँदी है, अँधेरा हो गया गहरा।
तुम्हारे जागने से ही, तो लगना था यहाँ पहरा।
बताओ, आजकल मालूम है सबको सियासत फिर,
नहीं दिखता खिलाड़ी कौन है औ’ कौन है मोहरा?”
“Modified Form 6 has not been approved by us. Let us be very clear.”
— मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत
तो फिर सवाल सीधा है:
जब सर्वोच्च न्यायालय ने संशोधित प्रपत्र 6 को मंज़ूरी नहीं दी, तो इसे किसने बदला? किसके आदेश पर बदला? और किस अधिकार के तहत बदला?
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने आज साफ़ कहा कि अभिलेख सामने आने पर सर्वोच्च न्यायालय यह देखना चाहेगा कि “किसने क्या संशोधन किया है।”
चुनाव आयोग ने पहले सर्वोच्च न्यायालय के मई के फ़ैसले का हवाला देते हुए इस अतिरिक्त घोषणा को न्यायालय की स्वीकृति प्राप्त बताया था। लेकिन आज सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणी ने इस दावे पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मतदाता सूची कोई प्रयोगशाला नहीं है।
प्रपत्र 6 कोई मामूली काग़ज़ नहीं है।
यह हर नागरिक के लोकतांत्रिक अधिकार/मताधिकार से जुड़ा दस्तावेज़ है।
अब देश जानना चाहता है-
प्रपत्र 6 किसने बदला?
क्यों बदला?
किसकी अनुमति से बदला?
और सर्वोच्च न्यायालय की अनुमति का दावा किस आधार पर किया गया?
इन सवालों के जवाब चाहिए।
साफ़ और सार्वजनिक जवाब।
— Shashi Tharoor (@ShashiTharoor) October 6, 2026
फॉर्म-6 में किए गए बदलाव किसके इशारे पर हुए- शशि थरूर
शशि थरूर ने सीधा सवाल करते हुए लिखा कि जब सर्वोच्च न्यायालय ने संशोधित फॉर्म-6 को मंज़ूरी नहीं दी, तो किसने बदला? किसके आदेश पर बदला ? और किस अधिकार के तहत बदला? अपनी कविता को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने लिखा कि चुनाव आयोग ने पहले सर्वोच्च न्यायालय के मई के फ़ैसले का हवाला देते हुए इस अतिरिक्त घोषणा को न्यायालय की स्वीकृति प्राप्त बताया था। लेकिन आज सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणी ने इस दावे पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मतदाताओं के हक़ की बात करते हुए शशि थरूर ने अपनी कविता में लिखा कि मतदाता सूची कोई प्रयोगशाला नहीं है फॉर्म-6 कोई मामूली दस्तावेज़ नहीं है, यह एक नागरिक के लोकतांत्रिक अधिकार, मताधिकार से जुड़ा दस्तावेज़ है।
सभी सवालों के जवाब सार्वजनिक हों
अपना कविता के अंत में उन्होंने लिखा कि अब देश जानना चाहता है है कि फॉर्म-6 किसने बदला, क्यों बदला और किसकी अनुमति से बदला गया ? और सर्वोच्च न्यायालय की अनुमति का दावा किस आधार पर किया गया ? इन सवालों के जवाब चाहिए वो भी साफ और सार्वजनिक जवाब।
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