नई दिल्ली: ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा UPI मर्चेंट पेमेंट पर 0.4% Merchant Discount Rate (MDR) लागू करने के केंद्र के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सुनवाई की। कोर्ट ने फिलहाल इस व्यवस्था पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया, लेकिन केंद्र सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र से यह स्पष्ट करने को कहा कि प्रस्तावित MDR की कानूनी प्रकृति क्या है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सवाल किया कि यह शुल्क फीस है, टैक्स है या किसी अन्य प्रकार का चार्ज। केंद्र को अपना जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया गया है।
क्या है ₹2,000 से ज्यादा UPI Payment का नया नियम?
केंद्र की नई व्यवस्था के तहत सभी UPI भुगतान पर शुल्क नहीं लगाया जा रहा है। प्रस्तावित MDR केवल कुछ Person-to-Merchant (P2M) यानी ग्राहक से व्यापारी को किए जाने वाले ₹2,000 से अधिक के डिजिटल भुगतान पर लागू होगा।
इस श्रेणी में सामान्य दर 0.4% रखी गई है। ₹75,000 या उससे अधिक के लेनदेन पर MDR को प्रति ट्रांजैक्शन ₹300 तक सीमित किया गया है। कुछ आवश्यक और कम मार्जिन वाले क्षेत्रों के लिए अलग फ्लैट MDR का प्रावधान भी किया गया है।
वहीं, किसी व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किया जाने वाला P2P UPI भुगतान, रकम कितनी भी हो, मुफ्त रहने की बात सरकार ने स्पष्ट की है। ₹2,000 तक के मर्चेंट पेमेंट भी MDR के दायरे से बाहर हैं।
याचिका में क्या चुनौती दी गई है?
यह याचिका वकील अंजन दत्ता की ओर से दाखिल की गई है। इसमें केंद्र की ओर से जारी अधिसूचना और 15 सितंबर को जारी MDR फ्रेमवर्क को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता ने इस व्यवस्था को रद्द करने और इसके लागू होने पर रोक लगाने की मांग की थी।
याचिका में मुख्य तौर पर MDR लागू करने के कानूनी आधार पर सवाल उठाया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि इस तरह का शुल्क लगाने के लिए पर्याप्त कानूनी आधार मौजूद नहीं है। मामले में अब केंद्र और अन्य संबंधित संस्थाओं के जवाब के बाद आगे की सुनवाई होगी।
केंद्र का कहना है- ग्राहकों से सीधे नहीं लिया जाएगा MDR
सरकार के अनुसार MDR कोई ऐसा टैक्स नहीं है जिसे केंद्र सरकार या NPCI सीधे वसूल करेगा। सरकार ने इसे भुगतान व्यवस्था से जुड़े विभिन्न भागीदारों के बीच वितरित किए जाने वाले शुल्क के रूप में समझाया है। इसमें बैंक, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर और UPI ऐप से जुड़े प्रतिभागी शामिल हैं।
वित्त मंत्रालय के मुताबिक बैंकों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है कि व्यापारी MDR की लागत ग्राहकों पर न डालें। UPI ऐप प्रदाताओं को भी अलग से प्लेटफॉर्म फीस या छिपे हुए चार्ज लगाने की अनुमति नहीं होगी।
सरकार का दावा है कि नए फ्रेमवर्क का असर केवल सीमित संख्या में मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर पड़ेगा और करीब 96% P2M ट्रांजैक्शन MDR से बाहर रहेंगे। छोटे व्यापारियों के लिए भी जीरो-MDR व्यवस्था जारी रखने की बात कही गई है।
अब आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल MDR व्यवस्था पर रोक नहीं लगाई है। अब केंद्र सरकार, RBI, NPCI और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस का जवाब देना होगा। इसके बाद अदालत इस मामले के कानूनी पहलुओं पर आगे सुनवाई करेगी।
इस मामले में अदालत का प्रमुख सवाल MDR की कानूनी प्रकृति और इसे लागू करने के अधिकार से जुड़ा है। इसलिए अगली सुनवाई में केंद्र का जवाब महत्वपूर्ण होगा।
Add GTC Bharat on Google