चंडीगढ़: शिरोमणि अकाली दल (पुनर सुरजीत) के वरिष्ठ नेताओं ने शिरोमणि अकाली दल (बादल) के साथ किसी भी तरह के समझौते की खबरों को अफवाह करार दिया है। पार्टी नेताओं ने कहा कि पंथक एकता के नाम पर किसी भी तरह का फैसला सिद्धांतों और श्री अकाल तख्त साहिब के आदेशों को ध्यान में रखकर ही किया जाना चाहिए।
पार्टी के वरिष्ठ नेता करनैल सिंह पीर मोहम्मद ने कहा कि वास्तविक पंथक एकता सिद्धांतों पर आधारित होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग अपने निजी हितों के लिए पंथक एकता को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
श्री अकाल तख्त साहिब के हुकमनामे का दिया हवाला
करनैल सिंह पीर मोहम्मद ने 2 दिसंबर के हुकमनामे का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें सुखबीर सिंह बादल से पार्टी अध्यक्ष पद छोड़ने और अपनी गलतियां स्वीकार करने को कहा गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि गलतियां स्वीकार करने के बाद बादल ने मुक्तसर साहिब में कथित तौर पर कहा कि उन्होंने बिना किसी कारण के गलतियां स्वीकार की थीं और उनसे कोई गलती नहीं हुई थी।
पीर मोहम्मद के अनुसार, इस तरह के बयानों से पंथक एकता की प्रक्रिया प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि किसी भी समझौते से पहले संबंधित नेताओं को अपने रुख और सिद्धांतों के प्रति स्पष्ट होना चाहिए।
चार प्रमुख अकाली धड़ों को एकजुट करने की अपील
पार्टी नेता दविंदर सिंह सोढ़ी ने चार प्रमुख अकाली धड़ों से एकजुट होने की अपील की। उन्होंने कहा कि पार्टी अध्यक्ष और श्री अकाल तख्त साहिब के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह जरूरत पड़ने पर एकता के लिए अपना पद छोड़ने तक को तैयार हैं। सोढ़ी ने कहा कि पंजाब इस समय नशे, कर्ज और बिगड़ती कानून-व्यवस्था जैसी गंभीर समस्याओं का सामना कर रहा है। उन्होंने परमिंदर सिंह झोटा की हत्या का उल्लेख करते हुए राज्य की स्थिति पर चिंता जताई।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन पर नियंत्रण कमजोर हो गया है और अकाली दल नशे के खिलाफ चल रहे संघर्ष से दूर होता जा रहा है। उनके मुताबिक, पंजाब के मौजूदा हालात में राजनीतिक दलों को निजी हितों से ऊपर उठकर जनहित और पंथक एकता के लिए काम करना चाहिए। यह प्रेस विज्ञप्ति शिरोमणि अकाली दल (पुनर सुरजीत) के मुख्य मीडिया सलाहकार तेजिंदर सिंह पन्नू की ओर से जारी की गई।
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