चंडीगढ़: पंजाब में पुलिसकर्मियों की सुरक्षा को लेकर एक कथित एडवाइजरी सामने आने के बाद सियासी विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे पत्र में पुलिसकर्मियों को घर से ड्यूटी और ड्यूटी से घर लौटते समय वर्दी नहीं पहनने तथा सादे कपड़ों में यात्रा करने की सलाह दिए जाने का दावा किया गया। कांग्रेस नेता अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने इसी दस्तावेज को साझा करते हुए पंजाब की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए। हालांकि, पंजाब पुलिस ने इस दस्तावेज को फर्जी बताया है।

कथित पत्र में क्या था?

सोशल मीडिया पर प्रसारित दस्तावेज को बॉर्डर रेंज, अमृतसर के आईजी की ओर से अमृतसर ग्रामीण, बटाला, गुरदासपुर और पठानकोट के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को भेजा गया बताया गया था। इसमें पुलिस कर्मचारियों की निजी आवाजाही के दौरान उनकी सुरक्षा को लेकर कई निर्देश होने का दावा किया गया।

कथित पत्र में पुलिसकर्मियों से ड्यूटी पर आते-जाते समय सादे कपड़े पहनने और सार्वजनिक स्थानों पर ऐसी कोई वस्तु प्रदर्शित नहीं करने की बात कही गई थी, जिससे उनकी पुलिस पहचान आसानी से जाहिर हो। इसमें बैज, पहचान पत्र और पुलिस उपकरणों को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित न करने की सलाह का भी उल्लेख था।

इसके अलावा पुलिसकर्मियों को अकेले यात्रा करने से बचने और ‘बडी पेयर सिस्टम’ के तहत साथी के साथ आवाजाही करने की सलाह दिए जाने का दावा किया गया। यात्रा शुरू करने और सुरक्षित गंतव्य तक पहुंचने की जानकारी संबंधित अधिकारी या कंट्रोल प्वाइंट को देने की बात भी कथित पत्र में थी।

ASI हरजीत सिंह की हत्या के बाद सामने आया विवाद

इस कथित एडवाइजरी को 18 सितंबर की तारीख से जोड़ा गया, यानी उसी अवधि में जब अमृतसर में ड्यूटी के दौरान ASI हरजीत सिंह की गोली मारकर हत्या की गई थी। पुलिस के अनुसार, हरजीत सिंह पर भकतांवाला अनाज मंडी के पास हमला हुआ था और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस ने जांच शुरू की थी।

इसी पृष्ठभूमि में पुलिसकर्मियों की व्यक्तिगत सुरक्षा को लेकर जारी बताए जा रहे इस पत्र ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया। कुछ रिपोर्टों में ऐसे निर्देशों को वास्तविक एडवाइजरी के रूप में भी प्रकाशित किया गया, जबकि बाद में पंजाब पुलिस ने आधिकारिक तौर पर इसकी प्रामाणिकता से इनकार किया।

पंजाब पुलिस ने क्या कहा?

विवाद बढ़ने के बाद पंजाब पुलिस ने सोशल मीडिया पर फैले संदेशों को “False Advisory” बताते हुए कहा कि पुलिस मुख्यालय या उसके अधीन किसी अन्य कार्यालय ने पुलिसकर्मियों को ड्यूटी पर जाते या लौटते समय वर्दी से बचने अथवा सादे कपड़ों में यात्रा करने का कोई ऐसा निर्देश जारी नहीं किया है। पुलिस ने लोगों और अपने कर्मचारियों से अपील की कि वे केवल आधिकारिक माध्यमों से मिलने वाली जानकारी पर भरोसा करें।

यानी फिलहाल उपलब्ध आधिकारिक पुलिस स्पष्टीकरण के अनुसार, सोशल मीडिया पर वायरल दस्तावेज को वास्तविक सरकारी आदेश नहीं माना जा रहा है।

विपक्ष ने उठाए कानून-व्यवस्था पर सवाल

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजा वड़िंग और अकाली दल नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने कथित पत्र को सोशल मीडिया पर साझा किया। दोनों नेताओं ने इसे पंजाब में पुलिस और कानून-व्यवस्था की स्थिति से जोड़ते हुए राज्य सरकार पर सवाल उठाए।

वड़िंग ने पत्र के साथ एक कथित ऑडियो भी साझा किया और मुख्यमंत्री भगवंत मान पर निशाना साधा। वहीं मजीठिया ने पुलिसकर्मियों की सुरक्षा को लेकर स्पष्टीकरण की मांग की। विपक्षी नेताओं की ये टिप्पणियां राजनीतिक आरोप हैं और इन्हें पंजाब पुलिस की ओर से खारिज किए गए दस्तावेज के आधार पर किया गया है।

इससे पहले भाजपा नेता सुनील जाखड़ ने भी पुलिसकर्मियों की सुरक्षा को लेकर सामने आए दावों पर सवाल उठाए थे। उन्होंने पुलिस पर हमलों की घटनाओं के संदर्भ में कानून-व्यवस्था पर सरकार से जवाब मांगा था।

अब असली सवाल क्या है?

इस पूरे विवाद में दो अलग-अलग बातें सामने आ रही हैं। एक तरफ सोशल मीडिया पर ऐसा पत्र प्रसारित हुआ, जिसे कुछ नेताओं ने पुलिस सुरक्षा से जुड़ा आधिकारिक दस्तावेज बताया। दूसरी तरफ पंजाब पुलिस ने इसकी प्रामाणिकता से स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया है।

ऐसे में फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यही है कि पंजाब पुलिस के आधिकारिक स्पष्टीकरण के मुताबिक ‘वर्दी न पहनने’ वाली एडवाइजरी जारी नहीं की गई थी। वहीं, पुलिसकर्मियों पर हालिया हमलों के कारण उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता वास्तविक बनी हुई है। इन दोनों मुद्दों को अलग-अलग देखना जरूरी है, ताकि किसी अप्रमाणित दस्तावेज के आधार पर गलत सूचना न फैले।