राजस्थान: राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने हरियाणा के साथ लंबे समय से लंबित यमुना जल समझौते पर हस्ताक्षर होने का स्वागत करते हुए इसे राज्य के शेखावाटी क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि इस समझौते से पानी से जुड़ी एक बड़ी समस्या का समाधान हो गया है।
दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा, "29 जून को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और मैंने मिलकर एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया। अब राजस्थान के ऐतिहासिक शेखावाटी क्षेत्र को भी यमुना का पानी मिलेगा। पानी से जुड़ा एक बड़ा मुद्दा सुलझ गया है।"
दशकों से लंबित परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में सफल
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार पिछले ढाई वर्षों में राजस्थान की दशकों से लंबित परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में सफल रही है। मुख्यमंत्री ने राम जल सेतु परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह योजना लंबे समय से मध्य प्रदेश और राजस्थान के बीच अटकी हुई थी, लेकिन अब इस पर सहमति बन चुकी है और 24,000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं पर काम चल रहा है।
Union Home Minister @AmitShah chairs a meeting on the signing of a water sharing agreement between Haryana and Rajasthan in New Delhi. Union Minister for Jal Shakti CR Paatil, Haryana CM Nayab Singh Saini and Rajasthan CM Bhajanlal Sharma were also present at the meeting.… pic.twitter.com/zh2dd2OSjI
— All India Radio News (@airnewsalerts) June 29, 2026
इस समझौते का सीधा असर जनता पर पड़ेगा
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बताया कि सरकार बनने के तुरंत बाद 12 फरवरी 2024 को हरियाणा सरकार के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए थे, ताकि वर्ष 1994 के समझौते के तहत राजस्थान को उसका निर्धारित जल हिस्सा मिल सके। यह परियोजना पश्चिमी यमुना नहर से भूमिगत पाइपलाइन के जरिए राजस्थान के हिस्से का यमुना जल राज्य तक पहुंचाने के लिए बनाई गई है, जिससे 1994 के समझौते के तहत आवंटित पानी का प्रभावी उपयोग किया जा सके।
मुख्यमंत्री ने इस उपलब्धि का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देते हुए कहा कि पूर्ववर्ती सरकारें इस समस्या का समाधान नहीं कर सकीं। उन्होंने कहा, "कांग्रेस की सरकारें राजस्थान, हरियाणा और केंद्र में रहीं, लेकिन उन्होंने हमारी समस्या को गंभीरता से नहीं समझा। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद करता हूं कि उन्होंने राजस्थान के जल संकट को समझा और समाधान की दिशा में कदम उठाए।"
हरियाणा के 10 स्थानों पर पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था भी होगी
गौरतलब है कि 29 जून को नई दिल्ली में राजस्थान और हरियाणा के बीच लंबे समय से लंबित यमुना जल समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इससे करीब 30 वर्षों से चला आ रहा गतिरोध समाप्त हो गया। 34,102 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज से 577 मिलियन क्यूबिक मीटर (एमसीएम) यमुना जल को 295.5 किलोमीटर लंबी भूमिगत पाइपलाइन के जरिए राजस्थान के चूरू जिले स्थित हंसियावास जलाशय तक पहुंचाया जाएगा। परियोजना के तहत 3.6 मीटर व्यास की तीन पाइपलाइन, निरीक्षण मार्ग, कृत्रिम जलाशय और आधुनिक डिजिटल जल प्रबंधन प्रणाली विकसित की जाएगी। साथ ही हरियाणा के 10 स्थानों पर पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था भी की जाएगी।
माननीय मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा जी के निर्णायक नेतृत्व में ऐतिहासिक यमुना जल समझौता पूरे प्रदेश के चहुंमुखी विकास और आर्थिक प्रगति का आधार बनेगा। विकसित राजस्थान के निर्माण के संकल्प को पूरा करने के चरण में यह पूरे प्रदेश के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। #wrdrajasthan… pic.twitter.com/JLVBsHejas
— Suresh Singh Rawat (@SureshRawatIN) June 30, 2026
पाइपलाइन के प्रस्तावित मार्ग को मिली सैद्धांतिक मंजूरी
राजस्थान सरकार के अनुसार, परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) केंद्रीय जल आयोग के ई-पीएएमएस पोर्टल पर अपलोड कर दी गई है, जबकि हरियाणा सरकार ने पाइपलाइन के प्रस्तावित मार्ग को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। परियोजना के क्रियान्वयन, संचालन और रखरखाव के लिए राजस्थान-हरियाणा यमुना जल परियोजना-एसपीवी (आरएचवाईडब्ल्यू-एसपीवी) का गठन किया जाएगा।
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