नई दिल्ली: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को भारत-रूस संबंधों पर सलाहकार समिति की बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, ऊर्जा, संपर्क, संस्कृति और लोगों के बीच संबंधों समेत द्विपक्षीय सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई।

जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर बैठक की जानकारी साझा करते हुए कहा कि भारत और रूस के बीच संतुलित तरीके से द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने की साझा महत्वाकांक्षा है। बैठक में रूस को भारतीय निर्यात बढ़ाने के लिए सात प्रमुख क्षेत्रों पर चर्चा हुई। इनमें ऑटोमोबाइल, दवा, खाद्य पदार्थ, समुद्री उत्पाद, इंजीनियरिंग सामान, रसायन और कपड़ा शामिल हैं। दोनों पक्षों के बीच भारत और यूरेशियन आर्थिक संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।

चेन्नई-व्लादिवोस्तोक गलियारे पर भी बातचीत

बैठक में चेन्नई-व्लादिवोस्तोक आर्थिक गलियारे, अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) और उत्तरी समुद्री मार्ग से जुड़े मुद्दों पर भी विचार-विमर्श हुआ। भारत ने इस दौरान अपने उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा को प्राथमिकता बताया। सरकार का कहना है कि आपूर्ति के लिए कई स्रोत बनाए रखना भारत की रणनीति का अहम हिस्सा है।

रूस में भारतीय श्रमिकों का मुद्दा उठा

बैठक में रूस में काम करने वाले भारतीय नागरिकों का मुद्दा भी प्रमुखता से सामने आया। रूस ने इस वर्ष करीब 70,000 भारतीय कुशल श्रमिकों को लेने पर सहमति जताई है, खासकर निर्माण और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में।

जयशंकर ने बताया कि भारत सरकार रूसी अधिकारियों के साथ उच्चतम स्तर पर संपर्क में है ताकि भारतीय नागरिकों को जल्द से जल्द वहां से मुक्त कराया जा सके। अब तक करीब 140 भारतीय नागरिकों को मुक्त कराया जा चुका है। वहीं, रूसी सेना में होने की सूचना वाले 55 भारतीय नागरिकों के बारे में भारत रूसी अधिकारियों के संपर्क में है।

संदिग्ध एजेंटों पर कार्रवाई

सरकार ने भारतीय नागरिकों को रूस की सेना में शामिल कराने वाले संदिग्ध एजेंटों के खिलाफ भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा कड़ी कार्रवाई किए जाने की जानकारी भी दी। बैठक में सदस्यों को रूसी सेना में शामिल होने से भारतीय नागरिकों को होने वाले गंभीर खतरों के बारे में भी बताया गया।

यूक्रेन संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान पर जोर

बैठक में यूक्रेन संघर्ष को खत्म करने और शांति स्थापित करने में भारत के प्रयासों पर भी चर्चा हुई। जयशंकर ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिश्केक में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात के दौरान कहा था कि “अनंत युद्ध को अब युद्ध की समाप्ति का रास्ता देना चाहिए।” प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की हाल में दिल्ली में भी मुलाकात हुई थी।

भारत ने शांति प्रयासों में मदद की पेशकश की

जयशंकर ने बताया कि वह पिछले महीने यूक्रेन गए थे और न्यूयॉर्क में यूक्रेन तथा रूस के विदेश मंत्रियों से भी मुलाकात की। बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि यदि भारत किसी भी तरीके से युद्ध समाप्त करने में मदद कर सकता है तो वह इसके लिए तैयार है।

बैठक में मॉस्को के वाल्दाई क्लब में राष्ट्रपति पुतिन की उस टिप्पणी का भी उल्लेख हुआ, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के पास शांति के लिए “पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान” खोजने के अच्छे विचार होने की बात कही थी। यूक्रेन के विदेश मंत्री की ओर से भारत के शांति प्रयासों की सराहना का भी बैठक में उल्लेख किया गया।