अमरीका-ईरान डील: पश्चिम एशिया में अमरीका, इज़राइल और ईरान के बीच चला संघर्ष 108 दिनों तक जारी रहा और हाल के वर्षों के सबसे गंभीर सुरक्षा संकटों में शामिल हो गया। हालांकि विस्तारित युद्धविराम के बाद सक्रिय सैन्य कार्रवाई काफी हद तक थम गई है, लेकिन उन मुद्दों पर बातचीत अभी भी जारी है, जिनकी वजह से यह युद्ध शुरू हुआ था।
28 फरवरी 2026 को अमरीका और इज़राइल ने ईरान के भीतर कई सैन्य और सरकारी ठिकानों पर समन्वित हवाई हमले किए। शुरुआती हमलों में ईरान के कई वरिष्ठ अधिकारियों की मौत हुई, जबकि नागरिक हताहत भी हुए। इसके जवाब में ईरान ने इज़राइल, अमेरिकी सैन्य ठिकानों और क्षेत्रीय सहयोगी देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू कर दिए। साथ ही उसने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक हॉर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया।
— Department of State (@StateDept) June 14, 2026
हॉर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से क्यों बढ़ा संकट?
हॉर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से क्षेत्रीय संघर्ष वैश्विक आर्थिक चिंता में बदल गया। तेल और गैस आपूर्ति प्रभावित हुई, अंतरराष्ट्रीय शिपिंग नेटवर्क पर दबाव बढ़ा और ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता फैल गई। मार्च के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार दावा करते रहे कि अमेरिकी और इज़राइली सैन्य कार्रवाई ने ईरान की सैन्य क्षमता को गंभीर रूप से कमजोर कर दिया है। दूसरी ओर, ईरान ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि अमेरिका जमीनी स्थिति को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है।
युद्धविराम की शुरुआत कैसे हुई?
मार्च के अंतिम सप्ताह और अप्रैल की शुरुआत में कूटनीतिक प्रयास तेज हो गए। 25 मार्च को पाकिस्तान के अधिकारियों ने कथित तौर पर अमेरिका का 15 सूत्रीय प्रस्ताव ईरान तक पहुंचाया। इसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर प्रतिबंध, मिसाइल सीमाएं, हॉर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलना और चरणबद्ध तरीके से प्रतिबंधों में राहत देने जैसे प्रावधान शामिल थे।
ईरान ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया और बदले में सुरक्षा गारंटी, युद्ध क्षतिपूर्ति और अपनी संप्रभुता को मान्यता देने जैसी मांगों वाला प्रतिप्रस्ताव पेश किया। इसके बाद 31 मार्च को पाकिस्तान और चीन ने संयुक्त शांति प्रस्ताव पेश किया, जिससे बातचीत को नई गति मिली।
अंतिम क्षणों में बढ़ गया था संकट
समझौते से कुछ घंटे पहले लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर इज़राइली हमलों ने पूरी प्रक्रिया को पटरी से उतारने का खतरा पैदा कर दिया था। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने बातचीत छोड़ने और जवाबी सैन्य कार्रवाई की तैयारी तक शुरू कर दी थी। हालांकि अमेरिका, कतर और पाकिस्तान के मध्यस्थों ने तेजी से हस्तक्षेप कर तनाव को और बढ़ने से रोका। आखिरकार ईरान ने तत्काल जवाबी कार्रवाई से परहेज किया और बातचीत जारी रखने पर सहमति दी।
क्या है मौजूदा समझौता?
ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने घोषणा की कि समझौते के तहत ईरान और उसके सहयोगी मोर्चों, जिनमें लेबनान भी शामिल है, उन पर सैन्य अभियान रोक दिए जाएंगे। हालांकि यह अंतिम शांति संधि नहीं है। यह केवल एक प्रारंभिक रूपरेखा समझौता (Framework Agreement) है, जो दोनों पक्षों को 60 दिनों का समय देता है ताकि वे परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय सुरक्षा, प्रतिबंधों और हॉर्मुज जलडमरूमध्य जैसे विवादित मुद्दों पर अंतिम समाधान तलाश सकें। इस सप्ताह स्विट्जरलैंड में औपचारिक हस्ताक्षर समारोह होने की उम्मीद है, जिसके बाद परमाणु विशेषज्ञों और अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थों के साथ तकनीकी स्तर की बातचीत शुरू होगी।
108 दिन की जंग: एक नजर में...
- 28 फरवरी 2026: अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर हमले शुरू किए।
- ईरान ने मिसाइल और ड्रोन हमलों से जवाब दिया।
- हॉर्मुज जलडमरूमध्य बंद किया गया।
- वैश्विक ऊर्जा और शिपिंग बाजार प्रभावित हुए।
- मार्च में कई दौर की कूटनीतिक पहल हुई।
- पाकिस्तान और चीन ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई।
- अप्रैल में युद्धविराम की दिशा में सहमति बनी।
- 108 दिनों बाद प्रारंभिक शांति समझौते पर सहमति बनी।
- अगले 60 दिनों में अंतिम समझौते पर बातचीत होगी।
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