नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार को सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल में शिफ्ट करने की अनुमति दे दी। यह फैसला उनकी पत्नी गितांजलि जे. आंगमो की उस याचिका पर सुनवाई के दौरान आया, जिसमें उन्होंने वांगचुक को परिवार की पसंद के निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की मांग की थी।
यह मामला उस समय और महत्वपूर्ण हो गया था जब वांगचुक को 18 जुलाई को जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया था। वह उस समय लंबे समय से जारी भूख हड़ताल पर थे।
The Delhi High Court has directed that activist Sonam Wangchuk be shifted to Medanta Hospital. The court also ordered that all medical test reports be handed over to a panel of doctors at Medanta. The hospital has been directed to form a panel of doctors for his treatment pic.twitter.com/wXKMruNcJ7
— IANS (@ians_india) July 21, 2026
HC ने मेडिकल रिपोर्ट और डॉक्टरों की राय पर की सुनवाई
दिल्ली हाई कोर्ट की पीठ ने सोमवार को सफदरजंग अस्पताल, AIIMS और निजी प्रयोगशाला से संबंधित मेडिकल रिपोर्ट और स्वास्थ्य बुलेटिन रिकॉर्ड पर मंगाए थे। अदालत ने वांगचुक की मेडिकल स्थिति और विभिन्न जांच रिपोर्टों की समीक्षा के बाद निजी अस्पताल में शिफ्ट करने की मांग पर सुनवाई की।
मंगलवार की सुनवाई में अदालत ने मेदांता अस्पताल में आगे के इलाज के लिए वांगचुक को स्थानांतरित करने की अनुमति दी। इससे पहले एकल पीठ ने उन्हें सफदरजंग अस्पताल से तत्काल डिस्चार्ज कर निजी अस्पताल में शिफ्ट करने की अंतरिम राहत देने से इनकार किया था।
पत्नी ने उठाए थे मेडिकल रिपोर्ट को लेकर सवाल
वांगचुक की पत्नी गितांजलि आंगमो ने सफदरजंग अस्पताल की मेडिकल रिपोर्टिंग और इलाज को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने दावा किया था कि अस्पताल के स्वास्थ्य बुलेटिन में पोटैशियम स्तर से जुड़ी पूरी जानकारी नहीं दी गई। आंगमो ने यह भी आरोप लगाया था कि वांगचुक को उनकी पसंद के अस्पताल में इलाज कराने की अनुमति नहीं दी जा रही थी। इसी के बाद उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया था।
21 दिन की भूख हड़ताल के बाद अस्पताल में भर्ती
सोनम वांगचुक 28 जून से जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर थे। उनका प्रदर्शन NEET-UG परीक्षा में कथित अनियमितताओं और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही की मांग को लेकर था। लगभग 21 दिनों की भूख हड़ताल के बाद 18 जुलाई को उनकी तबीयत को लेकर चिंता जताई गई और उन्हें सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया। इसके बाद उनके अस्पताल में रहने और इलाज को लेकर परिवार तथा प्रशासन के बीच विवाद सामने आया।
इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से निजी अस्पताल में शिफ्ट करने की तत्काल अनुमति नहीं दी थी। हालांकि, बाद की सुनवाई में मेडिकल रिपोर्ट और डॉक्टरों की राय पर विचार करने के बाद अदालत ने उन्हें मेदांता अस्पताल में इलाज कराने की अनुमति दे दी।
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