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बंगाल SIR पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश: न्यायिक अधिकारी करेंगे निगरानी

By: GTC News Desk  |  Edited By: GTC Bharat  |  Updated at: February 20th 2026 03:39 PM

बंगाल SIR पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश: न्यायिक अधिकारी करेंगे निगरानी
बंगाल SIR पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश: न्यायिक अधिकारी करेंगे निगरानी

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कलकत्ता हाईकोर्ट को निर्देश दिया है कि वह इस प्रक्रिया के लिए पर्याप्त संख्या में जिला न्यायाधीशों और न्यायिक अधिकारियों को नियुक्त करे। ये अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि मतदाता सूची से नाम हटाने या जोड़ने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो और किसी भी नागरिक के साथ भेदभाव न हो। कोर्ट ने यह कदम तब उठाया जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य सरकार ने चुनाव आयोग द्वारा नियुक्त 'माइक्रो-ऑब्जर्वर्स' की निष्पक्षता पर सवाल उठाए थे। अब न्यायिक अधिकारियों की मौजूदगी में दस्तावेजों की जांच और आपत्तियों का निपटारा किया जाएगा, जिससे प्रक्रिया की विश्वसनीयता बढ़ेगी।

कोर्ट ने एसआईआर (SIR) की समय सीमा को भी आगे बढ़ा दिया है। अब अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 28 फरवरी 2026 तक किया जा सकेगा। इसके साथ ही, कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि वह चुनाव आयोग को तुरंत 8,505 ग्रुप-बी अधिकारियों की सूची उपलब्ध कराए, ताकि वे इस कार्य में सहयोग कर सकें। पीठ ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य सरकार और चुनाव आयोग के बीच का टकराव लोकतांत्रिक प्रक्रिया में बाधा नहीं बनना चाहिए। यदि कोई अधिकारी चुनाव आयोग के निर्देशों का पालन नहीं करता है, तो आयोग को उसे हटाने की पूरी स्वतंत्रता होगी।

यह मामला तब तूल पकड़ा जब लगभग 58 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जाने और 1.36 करोड़ नामों में 'लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी' (तार्किक विसंगतियां) पाए जाने की खबरें आईं। टीएमसी सरकार का आरोप था कि भाजपा शासित राज्यों के अधिकारियों को माइक्रो-ऑब्जर्वर बनाकर बंगाल भेजा गया है, जो एक खास समुदाय को निशाना बना रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि 'मतदान का अधिकार' एक संवैधानिक अधिकार है और इसे तकनीकी खामियों की भेंट नहीं चढ़ाया जा सकता। कोर्ट ने आदेश दिया कि आधार कार्ड के अलावा माध्यमिक एडमिट कार्ड जैसे दस्तावेजों को भी सत्यापन के लिए मान्य माना जाए, ताकि वास्तविक नागरिकों को बाहर न किया जा सके।