नई दिल्ली: अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की रकम से जुड़ी कथित चोरी के मामले में चार्जशीट दाखिल होने के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने जांच पर सवाल उठाते हुए कथित पर्दादारी का आरोप लगाया और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र जांच की मांग की। वहीं, विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि जांच पूरी हो चुकी है और इसमें चढ़ावे की चोरी के अलावा कोई अन्य अनियमितता सामने नहीं आई है।

जांच में सीसीटीवी फुटेज, डिजिटल संदेशों, बैंक रिकॉर्ड, गवाहों के बयान और फोरेंसिक ऑडिट समेत कई साक्ष्यों की जांच की गई। रिपोर्टों के मुताबिक, सीसीटीवी फुटेज में चढ़ावे की रकम को कथित तौर पर हटाने या छिपाने की 105 घटनाएं सामने आईं। मामले में आठ लोगों को आरोपी बनाया गया है।चार्जशीट में अनुकल्प मिश्रा, अविनाश शुक्ला उर्फ शानी, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रामाशंकर मिश्रा, राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू और सुभाष श्रीवास्तव के नाम आरोपी के तौर पर शामिल हैं। सभी आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं।

जयराम रमेश ने एफआईआर में देरी पर उठाया सवाल

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए जांच को लेकर कई सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि 4 जून को बाथरूम से 2.25 लाख रुपये बरामद होने और संबंधित वीडियो व सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बावजूद एफआईआर 25 जून को दर्ज की गई। रमेश ने सवाल किया कि जब संदिग्ध कर्मचारियों की पहचान और कथित चोरी से जुड़े सबूत सामने आ चुके थे, तो आपराधिक कार्रवाई शुरू करने में 21 दिन की देरी क्यों हुई। उन्होंने यह भी पूछा कि इस अवधि में किन लोगों को बचाने का मौका मिला और क्या छिपाया गया।

105 घटनाओं का हवाला देकर जांच पर सवाल

रमेश ने चार्जशीट में सामने आई कथित 105 घटनाओं का हवाला देते हुए जांच के दायरे पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यदि सीसीटीवी में इतनी बड़ी संख्या में घटनाएं सामने आईं, हजारों डिजिटल संदेशों की जांच हुई और बैंक खातों व संपत्तियों की भी पड़ताल की गई, तो जांच केवल आठ आरोपियों तक सीमित क्यों रही। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि पूर्व ट्रस्ट महासचिव चंपत राय, ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा और निर्माण प्रभारी गोपाल राव को आरोपी बनाने के बजाय गवाह क्यों बनाया गया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, चार्जशीट में इन वरिष्ठ पदाधिकारियों को अभियोजन पक्ष के गवाह के तौर पर दर्ज किया गया है।

सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग

जयराम रमेश ने मामले में नई और स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए कहा कि जब तक चढ़ावे की कथित चोरी के लिए वास्तविक जिम्मेदारी तय नहीं होती, तब तक मामला बंद नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने जांच को पारदर्शी तरीके से सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराने की मांग की और प्रधानमंत्री से भी इस मुद्दे पर जवाब देने को कहा।

विहिप ने कहा- जांच पूरी, अब आरोपियों पर चलेगा मुकदमा

जयराम रमेश के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है। उन्होंने दावा किया कि जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हुई और इसमें फोरेंसिक ऑडिटर को भी शामिल किया गया था। आलोक कुमार के मुताबिक, जांच में चढ़ावे की चोरी सामने आई है और आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने कहा कि चढ़ावे के अलावा किसी अन्य तरह की गड़बड़ी नहीं मिली और रामलला को अर्पित कीमती वस्तुएं सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि अब मामले को अदालत में आगे बढ़ना चाहिए और जो लोग दोषी पाए जाएंगे, उन्हें मुकदमे का सामना करना होगा।

जांच में सामने आए 105 कथित मामले

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट को पहले दी गई जानकारी के मुताबिक, मंदिर परिसर के सीसीटीवी कैमरों में नकदी हटाने की 105 घटनाएं रिकॉर्ड हुई थीं। एसआईटी ने सीसीटीवी फुटेज के अलावा डिजिटल साक्ष्य, गवाहों के बयान, बैंक रिकॉर्ड और फोरेंसिक जांच को भी अपने निष्कर्षों का हिस्सा बनाया।

चार्जशीट में कथित चोरी के मामलों को मुख्य रूप से चढ़ावे की रकम की गिनती के दौरान हुई घटनाओं से जोड़ा गया है। जांचकर्ताओं के अनुसार, बैंक में रकम स्थानांतरित किए जाने के बाद चोरी होने का कोई सबूत नहीं मिला। अब मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया अदालत में होगी, जहां आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों और जांच में जुटाए गए साक्ष्यों की न्यायिक जांच की जाएगी।