शिमला, हिमाचल प्रदेश: हिमाचल प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने वर्ष 1975 में लगाए गए आपातकाल की 51वीं वर्षगांठ को 'काला दिवस' के रूप में मनाया। इस अवसर पर आयोजित प्रदर्शनी और संगोष्ठी में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने कांग्रेस पर लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों को कमजोर करने का आरोप लगाया। मीडिया से बातचीत करते हुए डॉ. राजीव बिंदल ने आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय बताते हुए इसे "संवैधानिक हत्या" करार दिया।
उन्होंने कहा कि 25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अदालत के फैसले के बाद सत्ता छोड़ने के बजाय देश में आपातकाल लागू कर लोकतांत्रिक संस्थाओं और नागरिक अधिकारों का दमन किया। उन्होंने कहा, "51 वर्ष पहले संविधान और जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों का गला घोंट दिया गया था। अदालत का फैसला अपने खिलाफ आने के बाद इंदिरा गांधी ने इस्तीफा देने की बजाय आपातकाल लागू कर दिया और लोकतांत्रिक संस्थाओं को दबाने का प्रयास किया।"
Some nightmares never end. The Emergency still lives in the memories of those who suffered through it.𝐈𝐧𝐝𝐢𝐫𝐚 𝐆𝐚𝐧𝐝𝐡𝐢 𝐝𝐢𝐝 𝐧𝐨𝐭 𝐬𝐩𝐚𝐫𝐞 𝐞𝐯𝐞𝐧 𝐜𝐡𝐢𝐥𝐝𝐫𝐞𝐧. 𝐒𝐦𝐭. 𝐒𝐮𝐧𝐢𝐭𝐚'𝐬 𝐟𝐚𝐦𝐢𝐥𝐲, 𝐢𝐧𝐜𝐥𝐮𝐝𝐢𝐧𝐠 𝐭𝐨𝐝𝐝𝐥𝐞𝐫𝐬, 𝐰𝐚𝐬 𝐣𝐚𝐢𝐥𝐞𝐝… pic.twitter.com/gmWU67wARt
— BJP Himachal Pradesh (@BJP4Himachal) June 25, 2026
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाया गया- भाजपा प्रदेश अध्यक्ष
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि 19 महीने तक चले आपातकाल के दौरान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाया गया, मीडिया पर सेंसरशिप लागू की गई और हजारों राजनीतिक विरोधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा लोकतंत्र समर्थकों को जेलों में बंद कर दिया गया।
उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस की सत्ता बचाने के लिए एक लाख से अधिक लोगों को जेल भेजा गया। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, चंद्रशेखर, राजनारायण और जयप्रकाश नारायण सहित कई बड़े नेताओं को हिरासत में लिया गया था। इसके अलावा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के तत्कालीन सरसंघचालक बालासाहेब देवरस और हजारों स्वयंसेवकों को भी जेल में डाला गया।
संविधान की मूल भावना से छेड़छाड़ की गई- भाजपा प्रदेश अध्यक्ष
राजीव बिंदल ने कहा कि आपातकाल का उद्देश्य नेहरू-गांधी परिवार के राजनीतिक हितों की रक्षा करना था। उन्होंने आरोप लगाया कि इस दौरान संविधान की मूल भावना से छेड़छाड़ की गई और नागरिकों के मौलिक अधिकारों को सीमित कर दिया गया।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा और नई पीढ़ी को आपातकाल के इतिहास से अवगत कराने के लिए भाजपा हर वर्ष इस दिन को याद करती है। "आज का युवा वर्ग उस दौर का प्रत्यक्ष गवाह नहीं है। इसलिए यह जरूरी है कि उन्हें बताया जाए कि किस प्रकार लोकतांत्रिक अधिकारों को निलंबित किया गया था और संविधान की रक्षा क्यों आवश्यक है।"
आपातकाल से जुड़े प्रमुख घटनाक्रमों को प्रदर्शित किया गया
इस अवसर पर भाजपा द्वारा आयोजित प्रदर्शनी में आपातकाल से जुड़े प्रमुख घटनाक्रमों को प्रदर्शित किया गया। वहीं संगोष्ठी में लोकतंत्र, शासन व्यवस्था और संवैधानिक संस्थाओं पर आपातकाल के प्रभावों पर चर्चा की गई। राज्यभर में आयोजित कार्यक्रमों में भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भाग लिया तथा लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक स्वतंत्रताओं की रक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। पार्टी नेताओं ने कहा कि आपातकाल का दौर देश को यह याद दिलाता है कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए सतत जागरूकता आवश्यक है।
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