धार, मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ द्वारा भोजशाला-कमाल मौला परिसर पर दिए गए फैसले के बाद भोजशाला मुक्ति यज्ञ के संयोजक गोपाल शर्मा ने रविवार को कहा कि अब यह परिसर “मां सरस्वती कंठाभरण” के नाम से जाना जाएगा। उन्होंने अदालत के फैसले को “ऐतिहासिक” बताया।
मीडिया से बातचीत में गोपाल शर्मा ने कहा कि हिंदू समाज सदियों से इस स्थल को मंदिर के रूप में मान्यता दिलाने के लिए संघर्ष कर रहा था। उन्होंने कहा, “1305 में अलाउद्दीन खिलजी ने हमारी मां का अपमान कर उन्हें यहां से बाहर कर दिया था। 720 वर्षों से हिंदू समाज इसके लिए संघर्ष कर रहा था। हजारों लोगों ने अपनी जान की आहुति दी।
#WATCH | Madhya Pradesh | Devotees perform hawan in the hawan kund of Bhojshala complex in DharIndore Bench of the Madhya Pradesh High Court declared the disputed Bhojshala-Kamal Maula complex a temple and granted the Hindu side the right to worship at the site pic.twitter.com/kb9sZUWUtg
— ANI (@ANI) May 17, 2026
धुल गया भोजशाला पर लगा कलंक
कई लोगों ने अपना पूरा जीवन इस उद्देश्य को समर्पित कर दिया। 1952 में हमारे पूर्वजों ने महाराजा भोज स्मृति वसंतोत्सव समिति बनाकर राजा भोज की वाग्देवी भोजशाला की मुक्ति का बीज बोया था। यह संघर्ष 720 वर्षों तक चला। आज हाईकोर्ट के माध्यम से भोजशाला पर लगा कलंक धुल गया है। कल तक यह भोजशाला कमाल मौला मस्जिद के नाम से जानी जाती थी, अब यह मां सरस्वती कंठाभरण के नाम से जानी जाएगी।”
गोपाल शर्मा ने दावा किया कि अदालत के आदेश के बाद परिसर में प्रतीकात्मक पूजा और धार्मिक अनुष्ठान किए गए। उन्होंने कहा, “अदालत ने केंद्र सरकार को उस मूर्ति को वापस भोजशाला में स्थापित करने का आदेश भी दिया है, जिसे अंग्रेज लंदन ले गए थे। हिंदू समाज में भारी उत्साह है।
#WATCH | Madhya Pradesh: Devotees offer prayers at the Bhojshala complex in Dhar.Indore Bench of the Madhya Pradesh High Court declared the disputed Bhojshala-Kamal Maula complex a temple and granted the Hindu side the right to worship at the site pic.twitter.com/qJTIJJdWM2
— ANI (@ANI) May 17, 2026
एक नए अध्याय की हो गई शुरुआत
वर्षों की तपस्या और संघर्ष अब पूर्ण विराम नहीं बल्कि एक नए अध्याय की शुरुआत है। आज हमने भोजशाला में मां सरस्वती का प्रतीकात्मक चित्र स्थापित किया और हवन-पूजन किया। पूरे दिन हवन चलता रहेगा।”
हाल ही में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के आदेश का जिक्र करते हुए गोपाल शर्मा ने कहा कि एएसआई ने भोजशाला को हिंदू मंदिर मानने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा, “एएसआई ने आदेश दिया है कि भोजशाला अब हिंदू मंदिर के रूप में जानी जाएगी। मुस्लिम समुदाय प्रशासन से चर्चा कर नमाज के लिए दूसरी व्यवस्था करे। केंद्र सरकार को मूर्ति की पुनर्स्थापना का निर्देश दिया गया है और प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
VIDEO | Bhojshala Mukti Yagna coordinator Gopal Sharma says, "This was not my fight, but the fight of the entire Hindu community. It was not for one place alone, but a victory of Hindu and Sanatana culture. For 720 years, the Hindu community here felt humiliated and made every… pic.twitter.com/ycHv5YN3ex
— Press Trust of India (@PTI_News) May 16, 2026
यहां मूल प्रतिमा भी होगी स्थापित
समय आने पर मूल प्रतिमा भी यहां स्थापित की जाएगी। फिलहाल हमने प्रतीकात्मक चित्र रखकर पूजा और स्थापना की शुरुआत कर दी है।” हाईकोर्ट के आदेश के बाद लगातार दूसरे दिन भी श्रद्धालु भोजशाला परिसर पहुंचे और पूजा-अर्चना की। धार कलेक्टर राजीव रंजन मीणा और पुलिस अधीक्षक सचिन शर्मा ने भी पूजा-अनुष्ठान में भाग लिया।
मुस्लिम पक्ष फैसले को दे सकता है चुनौति
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि विवादित भोजशाला-कमाल मौला परिसर मूल रूप से राजा भोज के भोज-परमार वंश काल का देवी वाग्देवी को समर्पित मंदिर है। अदालत ने एएसआई की उस पुरानी व्यवस्था को भी निरस्त कर दिया, जिसमें मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार को सीमित समय के लिए नमाज की अनुमति दी गई थी।
इस बीच, मुस्लिम पक्ष द्वारा हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दिए जाने की संभावना को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट में दो कैविएट याचिकाएं भी दायर की गई हैं।