नई दिल्ली, भारत: I-PAC के निदेशक और सह-संस्थापक विनेश चंदेल ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में नियमित जमानत के लिए पटियाला हाउस कोर्ट का रुख किया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धीरेंद्र राणा ने जमानत याचिका पर नोटिस जारी करते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 29 अप्रैल को निर्धारित की गई है।
यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब अदालत द्वारा पहले दी गई ED की 10 दिन की हिरासत 23 अप्रैल को समाप्त हो गई। इसके बाद आरोपी को अदालत में पेश किया गया। ED हिरासत देने के अपने पूर्व आदेश में दिल्ली की अदालत ने कहा था कि गिरफ्तारी के समय एजेंसी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत सभी वैधानिक आवश्यकताओं का पालन किया।
Court: He has drawn our attention to pleadings made in the petition where according to him there are allegations qua respondents 5-14. It is his case that they have uploaded proceedings of April 13 and even transmitted on social media thereafter. It is his submission that acts of…
— Live Law (@LiveLawIndia) April 23, 2026
विनेश चंदेल अनौपचारिक माध्यमों से लेन-देन में शामिल- कोर्ट
अदालत ने दर्ज किया कि गिरफ्तारी आदेश, गिरफ्तारी के आधार और संबंधित दस्तावेजों की प्रतियां चंदेल को विधिवत दी गई थीं और उनकी रसीद भी ली गई थी, साथ ही इन्हें निर्णायक प्राधिकरण को भी भेजा गया था।
अदालत ने PMLA की धारा 19(1), 19(2) और 19(3) के अनुपालन का उल्लेख करते हुए कहा कि सभी प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों का पालन किया गया।रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री का हवाला देते हुए अदालत ने ED के उन आरोपों का भी संज्ञान लिया, जिनमें कहा गया है कि चंदेल अनौपचारिक माध्यमों, जैसे हवाला, के जरिए धन के लेन-देन में शामिल थे और कुछ ट्रांजैक्शन औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से बाहर किए गए।
कई पहलुओं की गहनता से जांच जरूरी- कोर्ट
एजेंसी ने यह भी दावा किया कि जांच के दौरान दिए गए बयान एकत्रित साक्ष्यों से मेल नहीं खाते और कई संस्थाओं के साथ लेन-देन का कोई स्पष्ट वैध व्यावसायिक उद्देश्य नहीं था। इसके अलावा, अदालत ने ED के उस आरोप को भी दर्ज किया कि तलाशी कार्रवाई के बाद कुछ इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और ईमेल डिलीट किए गए, जिससे जांच प्रभावित हो सकती थी। अदालत ने माना कि इन पहलुओं की गहन जांच आवश्यक है।
'साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ मामले में कस्टोडियल पूछताछ जरूरी'
हिरासत को लेकर अदालत ने कहा था कि अपराध से अर्जित धन का पता लगाने, अन्य आरोपियों की पहचान करने और साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ रोकने के लिए कस्टोडियल पूछताछ जरूरी है। इसी के तहत 23 अप्रैल तक ED हिरासत दी गई थी, साथ ही यह निर्देश भी दिया गया था कि पूछताछ CCTV निगरानी और नियमित मेडिकल जांच जैसे सुरक्षा उपायों के तहत की जाए।