कोलकाता, पश्चिम बंगाल: Calcutta High Court ने आरजी कर मामले में कथित सबूत नष्ट किए जाने के आरोपों की जांच के आदेश दिए हैं। अदालत ने पीड़िता के परिवार द्वारा उठाए गए मुद्दों की दोबारा जांच करने का निर्देश भी दिया। आज जारी आदेश में न्यायमूर्ति शम्पा सरकार और न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष की पीठ ने कहा कि सीबीआई के संयुक्त निदेशक (पूर्वी क्षेत्र) की अगुवाई में तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) इस मामले की जांच करेगा।

अदालत ने सीबीआई को निर्देश दिया कि घटना की रात डिनर किए जाने से लेकर अगले दिन अंतिम संस्कार तक की पूरी घटनाक्रम की दोबारा जांच की जाए। इसके लिए सीबीआई को जरूरत पड़ने पर किसी भी व्यक्ति से पूछताछ करने की अनुमति दी गई है।

परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों की भी होगी जांच

एसआईटी पीड़िता के परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों की भी जांच करेगी। जांच रिपोर्ट 25 जून तक अदालत में पेश करनी होगी। इससे पहले पश्चिम बंगाल सरकार ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) को अभियोजन की मंजूरी दे दी थी।

संदीप घोष के खिलाफ कानूनी कार्रवाई

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने सोमवार को जारी सरकारी आदेश का हवाला देते हुए कहा कि इससे ईडी को कथित वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में संदीप घोष के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है।

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने सोशल मीडिया पर दी जानकारी

सुवेंदु अधिकारी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, “आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में 9 अगस्त 2024 को हमारी बहन ‘अभया’ के साथ हुए जघन्य दुष्कर्म और हत्या मामले में ईडी को कानूनी कार्रवाई और अभियोजन की औपचारिक मंजूरी दी गई है।”

उन्होंने पूर्व तृणमूल कांग्रेस सरकार की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि मामले की जांच को लंबे समय तक “जबरन और अनैतिक तरीके” से रोका गया।

29 नवंबर 2025 को सीबीआई ने दाखिल की थी चार्जशीट

इस बीच, 29 नवंबर 2025 को सीबीआई ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज में वित्तीय अनियमितताओं को लेकर चार्जशीट दाखिल की थी। इसमें संदीप घोष सहित डॉ. आशीष कुमार पांडे, बिप्लब सिंघा, सुमन हाजरा और अफसर अली खान के नाम शामिल थे।

यह जांच कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश के बाद शुरू की गई थी। भ्रष्टाचार मामले के अलावा संदीप घोष से हत्या मामले में भी पूछताछ की गई थी। जांच के तहत सीबीआई ने उनका पॉलीग्राफ टेस्ट भी कराया था। इसके बाद पश्चिम बंगाल की सियालदह अदालत ने ताला थाने के पूर्व प्रभारी अभिजीत मंडल और संदीप घोष को जमानत दे दी थी।

इस घटना के बाद देशभर में हुए थे भारी विरोध-प्रदर्शन

जमानत इसलिए मिली क्योंकि सीबीआई कानूनी रूप से निर्धारित 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं कर पाई थी। आरजी कर मेडिकल कॉलेज रेप और मर्डर केस 9 अगस्त 2024 को सामने आया था, जब 31 वर्षीय महिला पीजी ट्रेनी डॉक्टर का शव कॉलेज परिसर के सेमिनार रूम में मिला था। इस घटना के बाद देशभर में भारी विरोध प्रदर्शन हुए थे और पीड़िता को न्याय दिलाने की मांग उठी थी।