नई दिल्ली: फ्रांस में पिछले सप्ताह हुई हिंसा के बाद सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। शनिवार को होने वाले नए प्रदर्शनों से पहले मार्से और लियोन में नियोजित प्रदर्शनों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है, जबकि पेरिस के प्रमुख संग्रहालयों को बंद कर दिया गया है। अधिकारियों को आशंका है कि विरोध प्रदर्शन के दौरान फिर से लूटपाट, आगजनी और सार्वजनिक इमारतों पर हमले हो सकते हैं।

फ्रांस 24 की रिपोर्ट के अनुसार, देशभर में करीब 70,000 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए हेलीकॉप्टर, बख्तरबंद वाहन और पानी की बौछार करने वाले वाहनों को भी तैयार रखा गया है। कुछ इलाकों में कर्फ्यू और अन्य प्रतिबंध लागू किए गए हैं।

हिंसा की आशंका के बीच सुरक्षा व्यवस्था सख्त

फ्रांस के गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने शुक्रवार को सुरक्षा तैनाती की जानकारी देते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर हिंसा और लूटपाट के आह्वान किए जा रहे हैं। पिछले सप्ताह हुए प्रदर्शनों के दौरान नकाबपोश समूहों ने पेरिस और दूसरे शहरों में दुकानों तथा सार्वजनिक इमारतों को निशाना बनाया था। बढ़ते तनाव के बीच राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने वरिष्ठ मंत्रियों और अधिकारियों के साथ रक्षा परिषद की बैठक की। फ्रांस 24 के मुताबिक, मैक्रों का सुरक्षा बलों से भी मुलाकात करने का कार्यक्रम था, जबकि प्रशासन ने सप्ताहांत में संभावित हिंसा से निपटने की तैयारियां तेज कर दी हैं।

छात्रों के प्रदर्शन से शुरू हुआ आंदोलन

फ्रांस में विरोध प्रदर्शन की शुरुआत हाई स्कूल के छात्रों ने पढ़ाई की बिगड़ती परिस्थितियों को लेकर की थी। बाद में यह आंदोलन देशभर में फैल गया और इसमें महंगाई तथा बढ़ती जीवन-यापन लागत को लेकर व्यापक जन असंतोष भी जुड़ गया।

रिपोर्ट के अनुसार, पिछले सप्ताह पांच लाख से अधिक लोग सड़कों पर उतरे थे। प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसक घटनाओं ने सार्वजनिक सुरक्षा और सरकार की कानून-व्यवस्था बनाए रखने की क्षमता को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।

राष्ट्रपति मैक्रों ने हाल ही में प्रदर्शन तेज होने के बाद पहली बार माध्यमिक विद्यालयों के छात्रों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। हालांकि, छात्र प्रतिनिधियों का कहना है कि सरकार ने उनकी समस्याओं के समाधान के लिए अभी तक कोई ठोस प्रस्ताव पेश नहीं किया है।

छात्र संगठनों ने आंदोलन जारी रखने की बात कही

अभियान समूह हाई स्कूल रिन्यूअल के अध्यक्ष नथानेल कोम्बारी ने कहा कि राष्ट्रपति ने छात्रों की चिंताओं को सुना, लेकिन वे सरकार की प्रतिक्रिया से संतुष्ट नहीं हैं।

कोम्बारी ने कहा, “हम संतुष्ट नहीं हैं।” उन्होंने छात्रों से आंदोलन जारी रखने की अपील की। सोमवार को प्रधानमंत्री के साथ प्रस्तावित बातचीत से पहले छात्र संगठनों ने अपनी मांगों को लेकर लामबंदी जारी रखने के संकेत दिए हैं।

हिंसा के मामलों में 217 लोगों को जेल

फ्रांस सरकार ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन और लोगों की जायज मांगों को हिंसक एवं आपराधिक गतिविधियों से अलग रखने की बात कही है। फ्रांस 24 की रिपोर्ट के मुताबिक, न्याय मंत्री जेराल्ड डार्मैनिन ने बताया कि पिछले सप्ताह की हिंसा से जुड़े मामलों में अदालतों ने 217 लोगों को जेल की सजा सुनाई है। इनमें लगभग आधे ऐसे लोग हैं, जिन्हें इससे पहले कोई आपराधिक सजा नहीं मिली थी।

गुरुवार को राष्ट्रपति मैक्रों ने आपराधिक गतिविधियों के खिलाफ “अधिकतम सख्ती” बरतने की अपील की थी। उन्होंने वामपंथी विचारधारा वाले कुछ समूहों पर गणराज्य की व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया।

2027 के राष्ट्रपति चुनाव से पहले बढ़ा राजनीतिक तनाव

फ्रांस में जारी अशांति के बीच राजनीतिक तनाव भी बढ़ रहा है। देश में 2027 में राष्ट्रपति चुनाव होने हैं और मौजूदा घटनाक्रम के बीच राजनीतिक दलों की गतिविधियों पर भी सुरक्षा एजेंसियों की नजर है।

मरीन ले पेन के नेतृत्व वाली दक्षिणपंथी नेशनल रैली पार्टी इस सप्ताहांत ऑर्लेआं में अपना सम्मेलन आयोजित करने वाली है। अधिकारियों को आशंका है कि सम्मेलन के दौरान विरोध प्रदर्शन करने वाले समूह भी जुट सकते हैं, जिससे दोनों पक्षों के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो सकती है। प्रशासन ने सप्ताहांत के दौरान सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की है और संभावित हिंसा को रोकने के लिए निगरानी बढ़ा दी है।