तेहरान, ईरान: ईरान ने ब्रिटेन को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर अमरीका को ईरान के खिलाफ हमले के लिए ब्रिटिश सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल की अनुमति दी जाती है, तो इसे ईरान के खिलाफ आक्रामकता का कृत्य माना जाएगा। ईरान ने कहा कि ऐसी स्थिति में उसे आत्मरक्षा (Self-Defence) का अधिकार होगा।
प्रेस टीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची (Seyyed Abbas Araghchi) ने शुक्रवार को ब्रिटेन के विदेश मंत्री एड मिलिबैंड (Ed Miliband) के साथ फोन पर बातचीत के दौरान यह चेतावनी दी। अराघची ने कहा कि किसी भी हमलावर देश के साथ सहयोग करना, भले ही इसके लिए पहले से मौजूद किसी 'रक्षा समझौते' का हवाला दिया जाए, वो स्वीकार्य नहीं है।
'कोई देश हमलावर पक्ष की मदद करे तो ये 'आक्रामकता का कृत्य' है'
ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून और Definition of Aggression Resolution के तहत अगर कोई देश किसी हमलावर पक्ष को अपनी जमीन या सुविधाओं का इस्तेमाल दूसरे देश के खिलाफ अवैध हमला करने के लिए करने देता है, तो इसे आक्रामकता का कृत्य माना जा सकता है। ऐसी स्थिति में जिस देश पर हमला हुआ है, उसे आत्मरक्षा का अधिकार प्राप्त होता है।
ब्रिटेन के रुख पर भी ईरान ने जताई नाराजगी
अराघची ने ईरान के प्रति ब्रिटेन के रवैये को भी 'अनुचित' बताया। उन्होंने खास तौर पर इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) को निशाना बनाने वाले कदमों और ईरान के खिलाफ पिछले दो कथित बिना उकसावे वाले युद्धों में लंदन की भूमिका पर आपत्ति जताई।
उन्होंने ब्रिटिश सरकार से इस मामले में अपने रुख पर दोबारा विचार करने की अपील की। ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि उनका देश ईरान को निशाना बनाकर किए जाने वाले किसी भी अमेरिकी उल्लंघन का सामना करने के लिए तैयार है। उन्होंने तीसरे देशों को ऐसे कदमों में सहयोग करने को लेकर भी चेतावनी दी।
Iranian Foreign Minister Abbas Araghchi has condemned Britain's recent measures against Iran and warned against any cooperation with those carrying out aggression against Tehran.His remarks came during a phone call with his British counterpart amid reports that the United… pic.twitter.com/N6PXWdVq9e
— Al Mayadeen English (@MayadeenEnglish) August 1, 2026
ब्रिटिश विदेश मंत्री ने क्या कहा?
वहीं, ब्रिटेन के विदेश मंत्री एड मिलिबैंड ने कहा कि उनका देश ईरान के साथ युद्ध का हिस्सा नहीं है। मिलिबैंड ने कहा कि ब्रिटेन विवादों के समाधान के लिए कूटनीति में विश्वास करता है। उन्होंने ईरान के साथ राजनयिक संपर्क बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया, ताकि द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर किया जा सके और क्षेत्र में तनाव कम हो।
US को ब्रिटिश सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल की अनुमति का दावा
प्रेस टीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम (Andy Burnham) ने 21 जुलाई को ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियानों के लिए ब्रिटिश सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल को जारी रखने की मंजूरी दी थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह नीति उनके पूर्ववर्ती कीर स्टारमर (Keir Starmer) के कार्यकाल में शुरू हुई थी।
रिपोर्ट के मुताबिक, बर्नहम के प्रधानमंत्री बनने से पहले वरिष्ठ मंत्रियों और सुरक्षा अधिकारियों की एक बैठक में इस बात पर सहमति बनी थी कि अमरीका हिंद महासागर स्थित डिएगो गार्सिया (Diego Garcia) और इंग्लैंड के RAF Fairford सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल उन अभियानों के लिए जारी रख सकता है, जिन्हें ब्रिटेन 'रक्षात्मक' बताता है। पद संभालने के बाद बर्नहम को इन चर्चाओं की जानकारी दी गई और उन्होंने इस नीति का समर्थन किया।
प्रधानमंत्री बनने के बाद बनर्हम ने ट्रंप से की बातचीत
इस फैसले के बाद ब्रिटिश सैन्य सुविधाओं से अमेरिका के कुछ जारी सैन्य अभियानों को समर्थन मिलने की संभावना जताई गई है। वहीं, लंदन इन अभियानों को 'कुछ' गतिविधियों के तौर पर पेश करता रहा है। प्रेस टीवी के अनुसार, प्रधानमंत्री बनने के बाद बर्नहम ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) से फोन पर बातचीत भी की। इस दौरान उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ब्रिटेन की प्रतिबद्धता दोहराई।
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