अमेरिका: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि अगर जल्द कोई समझौता नहीं हुआ और 'Strait of Hormuz' को तुरंत नहीं खोला गया, तो अमेरिका ईरान के तेल कुओं, बिजली संयंत्रों और खार्ग द्वीप को पूरी तरह तबाह कर सकता है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘Truth Social’ पर कहा कि अमेरिका ईरान में “एक नए और अधिक समझदार शासन” के साथ बातचीत कर रहा है, जिससे सैन्य अभियान खत्म किया जा सके।
हालांकि, ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका कड़ी सैन्य कार्रवाई करेगा। उन्होंने अपने बयान में कहा, “अगर जल्द कोई समझौता नहीं हुआ और होर्मुज जलडमरूमध्य तुरंत ‘व्यापार के लिए खुला’ नहीं किया गया, तो हम ईरान के सभी बिजली संयंत्रों, तेल कुओं और खार्ग द्वीप को पूरी तरह नष्ट कर देंगे।”
President Trump: 🇺🇸🇮🇷 We're ahead of schedule with Iran. We're weeks ahead of schedule... and we have a group, it's really a new regime. pic.twitter.com/10Zg7TQny9
— Donald J Trump Posts TruthSocial (@TruthTrumpPost) March 30, 2026
मध्य पूर्व में अभी भी जारी है संघर्ष
मध्य पूर्व में जारी संघर्ष अब 30वें दिन में प्रवेश कर चुका है। 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद शुरू हुए इस युद्ध में अब तक 3,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इसके जवाब में ईरान ने इज़राइल, अमेरिकी सैन्य ठिकानों और खाड़ी क्षेत्र के अन्य ठिकानों पर हमले किए हैं।
इस बीच, होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की पकड़ ने वैश्विक बाजारों को झकझोर दिया है। दुनिया के लगभग 20% तेल व्यापार इसी मार्ग से गुजरता है, जिससे तेल कीमतों और आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ा है।
President Trump: 🇺🇸🇮🇷 We destroyed many targets today, and we're negotiating with them directly and indirectly. They gave us 20 big boats of oil going through the Hormuz Strait. pic.twitter.com/dS3aVf2k2l
— Donald J Trump Posts TruthSocial (@TruthTrumpPost) March 30, 2026
अहम समुद्री मार्ग पर खतरा बढ़ गया है
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के इस संघर्ष में शामिल होने से Bab el-Mandeb Strait जैसे अहम समुद्री मार्ग पर भी खतरा बढ़ गया है, जो रेड सी (लाल सागर) तक पहुंच का प्रमुख रास्ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर गंभीर रूप से पड़ सकता है।
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