अमृतसर, पंजाब: 6 जून को ऑपरेशन ब्लू स्टार की बरसी से पहले पंजाब पुलिस ने अमृतसर और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए व्यापक सुरक्षा ग्रिड तैयार किया गया है। प्रवीण कुमार सिन्हा ने अमृतसर का दौरा कर सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा की। उन्होंने बताया कि शांतिपूर्ण माहौल सुनिश्चित करने के लिए करीब 4,000 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है।

प्रवीण कुमार सिन्हा ने कहा कि ऑपरेशन ब्लू स्टार की बरसी के अवसर पर कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिसके कारण सुरक्षा दृष्टि से यह समय संवेदनशील माना जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए पूरे पंजाब, विशेष रूप से अमृतसर और उसके आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है।

सशस्त्र पुलिस बल की 5 कंपनियों की भी तैनाती की गई

प्रवीण कुमार सिन्हा ने बताया कि अमृतसर में जिले के बाहर से 2,000 पुलिसकर्मी और 30 राजपत्रित अधिकारियों को बुलाया गया है। इसके अलावा अमृतसर जिला पुलिस के 2,000 जवान भी तैनात हैं और सभी को हाई अलर्ट पर रखा गया है। सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए शहर में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की 5 कंपनियां भी तैनात की गई हैं।

6 जून तक होगा रोजाना फ्लैग मार्च

अमृतसर पुलिस लगातार फ्लैग मार्च कर रही है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह फ्लैग मार्च 6 जून तक जारी रहेगा। शहर के प्रमुख बाजारों, पुराने शहर के इलाकों, स्वर्ण मंदिर और आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में फ्लैग मार्च निकाला जा रहा है। शहर में लगातार गश्त, नाकेबंदी और वाहनों की जांच की जा रही है। संवेदनशील स्थानों पर विशेष रूप से निगरानी रखी जा रही है। पुलिस द्वारा जगह-जगह सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से भी निगरानी की जा रही है, जिससे किसी अप्रिय घटना को अंजाम न दिया जा सके। इसके अलावा, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी विशेष निगरानी रखी जा रही है, ताकि किसी भी तरह की अफ़वाह या भड़काऊ सामग्री फैलाने वालों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जा सके।

ऑपरेशन ब्लू स्टार क्या था?

ऑपरेशन ब्लू स्टार 6 जून 1984 को भारतीय सेना द्वारा चलाया गया एक सैन्य अभियान था। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के निर्देश पर यह कार्रवाई अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर परिसर में छिपे उग्रवादियों को बाहर निकालने के लिए की गई थी। उस समय जरनैल सिंह भिंडरांवाले और उनके समर्थकों पर स्वर्ण मंदिर परिसर में हथियार जमा करने के आरोप थे। सेना की कार्रवाई के दौरान भिंडरांवाले और उनके कई समर्थक मारे गए थे।

ऑपरेशन ब्लू स्टार को लेकर देशभर में व्यापक बहस और आलोचना हुई थी। इसके कुछ महीनों बाद, 31 अक्टूबर 1984 को इंदिरा गांधी की उनके सिख अंगरक्षकों बेअंत सिंह और सतवंत सिंह द्वारा हत्या कर दी गई थी।