मुर्शिदाबाद, पश्चिम बंगाल: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर जारी राजनीतिक संकट के बीच कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में "एकनाथ शिंदे मॉडल" लागू करने की कोशिश हो रही है और टीएमसी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सामने आत्मसमर्पण कर रही है।
मीडिया से बातचीत में अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि जिन निर्वाचित प्रतिनिधियों पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं, वे नया राजनीतिक समूह बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि बंगाल में महाराष्ट्र जैसी राजनीतिक स्थिति पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है।
"टीएमसी के कई विधायक भाजपा में जाने से डर रहे हैं"
अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि टीएमसी के कई विधायक भाजपा में जाने से डर रहे हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि मुस्लिम समुदाय इसका विरोध करेगा। चौधरी ने यह भी कहा कि मौजूदा घटनाक्रम से ममता बनर्जी की राजनीतिक स्थिति प्रभावित हो सकती है।
#WATCH | Murshidabad, West Bengal: On TMC’s leaders leaving TMC, Congress leader Adhir Ranjan Chowdhury says, "They are surrendering in front of the BJP. All the elected representatives who are trying to make a new party have at least one accusation of corruption against them...… pic.twitter.com/hmdIVyUxVI
— ANI (@ANI) June 3, 2026
विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के नाम की मांग की
यह बयान ऐसे समय आया है जब टीएमसी के भीतर बगावत खुलकर सामने आ गई है। पार्टी से निष्कासित नेताओं ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा सहित बागी विधायकों के एक समूह ने दावा किया है कि उन्हें पश्चिम बंगाल विधानसभा के 58 विधायकों का समर्थन प्राप्त है।
बागी गुट ने विधानसभा अध्यक्ष रथींद्रनाथ बोस को पत्र सौंपकर विपक्ष के नेता (एलओपी) पद के लिए ऋतब्रत बनर्जी के नाम की मांग की है। साथ ही, मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) पद के लिए संदीपन साहा का नाम प्रस्तावित किया गया है। पत्र में जावेद अहमद खान, सेउली साहा और सबीना यास्मीन को उपनेता विपक्ष बनाने का भी प्रस्ताव रखा गया है।
ममता बनर्जी को पार्टी नेता के रूप में मान्यता दी गई
हालांकि, पत्र में ममता बनर्जी को पार्टी नेता के रूप में मान्यता दी गई है। बताया जा रहा है कि विधानसभा अध्यक्ष ने पत्र स्वीकार कर लिया है और प्रक्रिया विचाराधीन है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि 58 विधायकों का दावा सही साबित होता है, तो यह संख्या दल-बदल विरोधी कानून के तहत आवश्यक दो-तिहाई समर्थन से अधिक होगी। इससे पार्टी में औपचारिक विभाजन और महाराष्ट्र जैसी राजनीतिक पुनर्संरचना की संभावना बढ़ सकती है।
संगठन को मजबूत करना और चुनौतियों का सामना करना है- TMC
इस बीच, ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल में अपनी सभी संगठनात्मक समितियों और फ्रंटल संगठनों को तत्काल प्रभाव से भंग करने की घोषणा की है।
पार्टी ने कहा है कि वह संगठन के सभी स्तरों पर आत्ममंथन, प्रदर्शन समीक्षा और व्यापक मूल्यांकन करेगी। इसके बाद नए सिरे से संगठनात्मक ढांचे का गठन किया जाएगा। टीएमसी ने कहा कि उसका उद्देश्य संगठन को और मजबूत बनाना तथा भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना है।
Add GTC Bharat on Google