नई दिल्ली: अमरीका और ईरान के बीच उच्च-स्तरीय “इस्लामाबाद वार्ता” के विफल होने से अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि दुनिया अब एक वैश्विक आर्थिक संकट के कगार पर खड़ी है। विदेश मामलों के विशेषज्ञ रॉबिंदर सचदेव ने मीडिया से कहा कि इन वार्ताओं का असफल होना सभी पक्षों—अमेरिका, ईरान, क्षेत्र और भारत—के लिए “दुर्भाग्यपूर्ण” है।
यह स्थिति एक खतरनाक मोड़ की ओर इशारा करती है, जहां “कठोर रेखाएं खींच दी गई हैं।” उन्होंने कहा, “वार्ता का सकारात्मक परिणाम न निकलना सभी के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे संकेत मिलता है कि संघर्ष जारी रहेगा, जिसका वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। हालांकि अभी भी उम्मीद है कि दोनों पक्ष पीछे हट सकते हैं, लेकिन अन्यथा युद्ध की स्थिति बन सकती है।”
#WATCH | Delhi: On no agreement between Iran and US after 21 hours of talks in Pakistan's Islamabad, Foreign Affairs Expert Robinder Sachdev says, "The fact that the talks in Islamabad did not yield positive results is definitely unfortunate. It is unfortunate for all parties… pic.twitter.com/Dtb0Jw4fEI
— ANI (@ANI) April 12, 2026
भारी हमलों के बावजूद ईरान नहीं झुका
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल, जिसका नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे थे, उन्होंने पाकिस्तान की मध्यस्थता की सराहना की, लेकिन कोई समझौता नहीं हो सका। सचदेव ने कहा कि इस संघर्ष ने अमेरिकी सैन्य शक्ति की एक बड़ी सीमा को उजागर किया है और वो है- हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को खोल पाने में असमर्थता।
उन्होंने कहा, “मुख्य मुद्दे हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य, परमाणु संवर्धन और अन्य मूलभूत मतभेद थे। भारी हमलों के बावजूद ईरान अमेरिकी मांगों के आगे नहीं झुका है। हॉर्मुज़ अब इस संघर्ष में एक ‘सुपर हथियार’ बन गया है।”
हॉर्मुज़ अब ईरान के लिए एक प्रभावी ‘चोक पॉइंट’
सचदेव के अनुसार, ईरान ने यह समझ लिया है कि छोटे पनडुब्बियों, टॉरपीडो, तेज नावों और बारूदी सुरंगों के जरिए वह वैश्विक व्यापार को पूरी तरह रोक सकता है। उन्होंने कहा, “रणनीतिक रूप से हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य अब ईरान के लिए एक प्रभावी ‘चोक पॉइंट’ बन गया है। यहां से गुजरने वाले हर जहाज की कीमत करोड़ों डॉलर होती है और बिना बीमा के कोई भी जहाज इस क्षेत्र में प्रवेश नहीं करेगा।”
उन्होंने यह भी कहा कि बीमा कंपनियां युद्ध क्षेत्र में जहाजों को कवर करने से इनकार कर रही हैं, जिससे अमेरिका की सैन्य मौजूदगी भी बेअसर हो जाती है। सिर्फ सैन्य ताकत के दम पर हॉर्मुज़ को नहीं खोला जा सकता। जब तक बीमा नहीं मिलेगा, कोई भी वाणिज्यिक जहाज वहां नहीं जाएगा।
ट्रंप पर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ रहा है
ईरान की “रेड लाइन्स” भी स्पष्ट हैं—वह अपने परमाणु कार्यक्रम पर संप्रभुता और हॉर्मुज़ पर नियंत्रण छोड़ने को तैयार नहीं है। साथ ही, वह कतर और अमेरिका में फंसे अपने फंड्स की रिहाई और बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान के लिए मुआवजा भी चाहता है। वॉशिंगटन में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ रहा है।
पेट्रोल की कीमतें बढ़ने से जनता में असंतोष है और 2026 के मध्यावधि चुनाव नजदीक हैं। हालांकि ट्रंप ने ईरान को हथियार देने वाले देशों पर 50% टैरिफ लगाने की धमकी दी है, लेकिन चीन के साथ संभावित व्यापार समझौते के कारण यह कदम व्यवहारिक नहीं लगता।
हॉर्मुज़ की पूर्ण नौसैनिक नाकाबंदी हो सकती है
जैसे-जैसे कूटनीतिक विकल्प खत्म हो रहे हैं, ट्रंप ने संकेत दिया है कि अगला कदम हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य की पूर्ण नौसैनिक नाकाबंदी हो सकती है। युद्धविराम की समयसीमा समाप्त होने के करीब है और पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था एक 21 मील चौड़े जलमार्ग पर टिकी हुई है, जिसे अब तक सैन्य शक्ति भी पूरी तरह नियंत्रित नहीं कर पाई है।