डिफेंस इंडेक्स में जोरदार तेजी और टॉप गेनर्स
बाजार में मची इस 'खरीद लूट' का सबसे ज्यादा फायदा सरकारी और निजी रक्षा कंपनियों को मिल रहा है। पारस डिफेंस, एमटीएआर टेक्नोलॉजीज, और गार्डन रीच शिपबिल्डर्स के शेयरों में आज 4-4 प्रतिशत तक की जबरदस्त तेजी देखी गई। वहीं, दिग्गज डिफेंस पीएसयू जैसे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स (HAL) और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL) के शेयर भी 2-2 फीसदी की मजबूती के साथ कारोबार कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध जैसी स्थितियों में रक्षा उपकरणों की मांग और सरकारी खर्च बढ़ने की उम्मीद रहती है, जिससे निवेशक इन शेयरों को एक 'सामरिक हेज' (Strategic Hedge) के रूप में देख रहे हैं।
कच्चे तेल का दबाव और बाजार में घबराहट
जहाँ एक तरफ डिफेंस शेयरों में तेजी है, वहीं दूसरी ओर आम निवेशक डरे हुए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव से ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें $71 प्रति बैरल के पार निकल गई हैं। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतों में लगी यह आग भारतीय रुपये और अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। इसी वजह से आज निवेशकों की लगभग ₹7.55 लाख करोड़ की संपत्ति स्वाहा हो गई। आईटी और बैंकिंग जैसे प्रमुख सेक्टरों में बिकवाली का माहौल है, क्योंकि बाजार को डर है कि युद्ध की स्थिति में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) पूरी तरह ठप हो सकती है।
निवेशकों के लिए विशेषज्ञों की राय
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि डिफेंस शेयरों में यह तेजी फिलहाल 'भावनात्मक' (Sentimental) अधिक है। हालाँकि, भारत सरकार ने बजट 2026-27 में रक्षा बजट को 15.20% बढ़ाकर ₹7.85 लाख करोड़ कर दिया है, जो इन कंपनियों के लिए लंबी अवधि में सकारात्मक है। विश्लेषकों ने सलाह दी है कि निवेशकों को केवल युद्ध की खबरों के आधार पर ऊंचे स्तरों पर खरीदारी से बचना चाहिए और कंपनी के 'ऑर्डर बुक' व 'एग्जीक्यूशन' क्षमता पर ध्यान देना चाहिए। युद्ध की आशंकाओं के बीच मझगांव डॉक और कोचीन शिपयार्ड जैसे शेयरों पर भी नजर रखना फायदेमंद हो सकता है, क्योंकि समुद्री सुरक्षा की चुनौतियां बढ़ने पर इनका महत्व और बढ़ जाएगा।
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