शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, कड़े सुरक्षा इंतजामों और सीसीटीवी निगरानी के कारण बड़ी संख्या में छात्र परीक्षा छोड़ रहे हैं। शुरुआती दो दिनों में ही करीब 3.40 लाख से अधिक परीक्षार्थियों ने परीक्षा छोड़ दी थी।
परीक्षा केंद्रों से संकलन केंद्रों (कोठार) तक उत्तर पुस्तिकाएं ले जाने में बरती जा रही लापरवाही पर सवाल उठे हैं। कई जगहों पर कॉपियों को बिना सुरक्षा के बाइक या साइकिल से ले जाते देखा गया है, जिस पर बोर्ड ने सख्त संज्ञान लिया है।
उत्तर प्रदेश एसटीएफ (STF) ने मैनपुरी समेत कई जिलों में नकल कराने वाले गिरोहों का पर्दाफाश किया है। सामूहिक नकल के मामले में अब तक कई अभियुक्तों और सॉल्वरों को गिरफ्तार किया गया है।
उत्तर प्रदेश में हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षाएं आज से शुरू हो गई हैं। इस वर्ष लगभग 53 लाख छात्र-छात्राएं परीक्षा में शामिल हो रहे हैं और पूरे राज्य में 8000 से अधिक परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। परीक्षा को पारदर्शी और नकल-मुक्त बनाने के लिए प्रशासन ने विशेष तैयारियां की हैं।
परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई है और कई स्थानों पर पुलिस बल तैनात किया गया है। राज्य सरकार ने डिजिटल निगरानी पर विशेष ध्यान दिया है। परीक्षा केंद्रों पर पहचान पत्र जांच, सीसीटीवी निगरानी और सख्त निरीक्षण की व्यवस्था लागू की गई है ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता को रोका जा सके।
छात्रों और अभिभावकों में परीक्षा को लेकर उत्साह और तनाव दोनों दिखाई दे रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि इस बार प्रश्नपत्र पाठ्यक्रम के अनुसार तैयार किए गए हैं और छात्रों को समय प्रबंधन पर ध्यान देना चाहिए।
सरकार ने छात्रों के लिए हेल्पलाइन और मार्गदर्शन सुविधाएं भी उपलब्ध कराई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में परीक्षार्थियों के लिए सफल आयोजन प्रशासन की बड़ी जिम्मेदारी है।
इन परीक्षाओं का परिणाम राज्य के उच्च शिक्षा और करियर योजनाओं पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालता है। इसलिए प्रशासन और शिक्षा विभाग दोनों ही परीक्षा प्रक्रिया को सुचारू रूप से पूरा करने पर ध्यान दे रहे हैं।