तमिलनाडु की राजनीति में आज एक नया इतिहास रचा गया है। दिग्गज अभिनेता से राजनेता बने 'थलपति' विजय ने विधानसभा में अपना पहला शक्ति परीक्षण (Floor Test) सफलतापूर्वक जीत लिया है। 13 मई 2026 को हुई इस ऐतिहासिक वोटिंग में विजय की पार्टी 'तमिलगा वेत्री कड़गम' (TVK) को 144 विधायकों का भारी समर्थन प्राप्त हुआ, जिसके बाद उनकी सरकार की स्थिरता पर मुहर लग गई है।
एक नए युग की शुरुआत: सुपरस्टार से मुख्यमंत्री तक का सफर
तमिलनाडु विधानसभा के गलियारों में आज वह हलचल दिखी जो दशकों में एक बार देखने को मिलती है। मुख्यमंत्री विजय, जिन्होंने अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत 'तमिलगा वेत्री कड़गम' (TVK) के साथ की थी, उन्होंने आज सदन के पटल पर अपनी सरकार का बहुमत साबित कर दिया। 234 सदस्यीय विधानसभा में सरकार बचाने के लिए 118 के जादुई आंकड़े की जरूरत थी, लेकिन विजय सरकार ने 144 विधायकों का समर्थन हासिल कर विपक्ष के सभी दावों को ध्वस्त कर दिया।
यह जीत केवल आंकड़ों की जीत नहीं है, बल्कि तमिलनाडु की राजनीति में उस 'तीसरे विकल्प' के उदय की पुष्टि है, जिसका इंतजार राज्य की जनता लंबे समय से कर रही थी। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही माहौल तनावपूर्ण था, लेकिन जैसे-जैसे संख्या बल स्पष्ट हुआ, सत्ता पक्ष के खेमे में उत्साह बढ़ता गया।
संख्या बल का गणित: किसने दिया साथ और किसने छोड़ा हाथ?
फ्लोर टेस्ट के दौरान सदन का दृश्य काफी दिलचस्प रहा। जहाँ एक तरफ मुख्य विपक्षी दल DMK (द्रमुक) ने सदन से वॉकआउट किया, वहीं दूसरी ओर विजय सरकार को कई अप्रत्याशित सहयोगियों का साथ मिला।
समर्थन देने वाले दल:
- TVK (तमिलगा वेत्री कड़गम): मुख्य सत्ताधारी दल।
- कांग्रेस (INC): विजय सरकार को स्थिरता प्रदान करने में अहम भूमिका।
- वामपंथी दल: CPI और CPI(M) ने भी सरकार के पक्ष में मतदान किया।
- VCK और IUML: क्षेत्रीय गठबंधन सहयोगियों का पूर्ण समर्थन।
- AIADMK (बागी गुट): सबसे चौंकाने वाला मोड़ एआईएडीएमके के बागी गुट का समर्थन रहा। सीवी शनमुगम और एसपी वेलुमणि के नेतृत्व वाले गुट ने सरकार के पक्ष में वोट देकर डीएमके और ईपीएस (EPS) गुट को बड़ा झटका दिया।
विरोध और वॉकआउट:
एमके स्टालिन के नेतृत्व वाली DMK ने फ्लोर टेस्ट की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए सदन से वॉकआउट किया। वहीं, एडप्पादी के. पलानीस्वामी (EPS) के नेतृत्व वाले एआईएडीएमके के धड़े ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया या विरोध दर्ज कराया।
मुख्यमंत्री विजय का पहला संबोधन: शासन और स्थिरता पर जोर
बहुमत साबित करने के बाद सदन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री विजय ने इसे 'जनता की जीत' बताया। उन्होंने साफ किया कि उनकी सरकार का मुख्य उद्देश्य राजनीतिक प्रतिशोध नहीं, बल्कि विकास और जनकल्याण है।
"आज का दिन तमिलनाडु के भविष्य के लिए एक नई सुबह है। 144 विधायकों का यह समर्थन केवल एक संख्या नहीं, बल्कि करोड़ों तमिल लोगों की उम्मीदों का प्रतिबिंब है। हमारी सरकार का पहला लक्ष्य राज्य में सुशासन स्थापित करना और चुनावी वादों को समय सीमा के भीतर पूरा करना है।" - मुख्यमंत्री विजय
विपक्ष का रुख और राजनीतिक प्रभाव
डीएमके के वॉकआउट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले समय में विधानसभा के भीतर टकराव और बढ़ने वाला है। विपक्षी दलों का आरोप है कि यह गठबंधन 'अप्राकृतिक' है और बागी विधायकों की मदद से सरकार बचाई गई है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्ष फिलहाल विजय के 'क्रेज' और उनके ठोस गठबंधन को चुनौती देने में विफल रहा है।
जनता की प्रतिक्रिया और जश्न का माहौल
जैसे ही विधानसभा अध्यक्ष ने परिणामों की घोषणा की, पूरे चेन्नई और तमिलनाडु के विभिन्न जिलों में जश्न का माहौल शुरू हो गया। GTC Bharat के ग्राउंड रिपोर्टर्स के अनुसार, मदुरै, कोयंबटूर और तिरुचिरापल्ली जैसे शहरों में टीवीके कार्यकर्ताओं ने मिठाइयां बांटी और पटाखे फोड़े। प्रशंसकों का मानना है कि सिनेमा के पर्दे पर 'सबकी मदद करने वाले' थलपति अब असल जिंदगी में भी लोगों के दुखों को दूर करेंगे।