चंडीगढ़, भारत: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने मंगलवार को मनी लॉन्ड्रिंग जांच और कथित फर्जी जीएसटी लेनदेन मामले में पंजाब के मंत्री और आम आदमी पार्टी सांसद संजीव अरोड़ा को गिरफ्तारी से राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर सुनवाई 14 मई तक टाल दी है।

इससे पहले गुरुग्राम की विशेष अदालत ने आप सांसद संजीव अरोड़ा को सात दिन की ईडी हिरासत में भेजा था। 9 मई को चंडीगढ़ में हुई उनकी गिरफ्तारी कथित तौर पर 100 करोड़ रुपये से अधिक के फर्जी जीएसटी लेनदेन से जुड़ी हुई है।

गिरफ्तारी असंवैधानिक और PMLA के खिलाफ है

संजीव अरोड़ा के वकील ने मीडिया से बातचीत में कहा, “हमने अदालत में उनकी गिरफ्तारी को चुनौती दी है। हमारा कहना है कि यह गिरफ्तारी संवैधानिक प्रावधानों और पीएमएलए के खिलाफ है। जिस तरह गिरफ्तारी की गई और जिस आधार पर एफआईआर दर्ज हुई, वह भी अवैध है। यही मुद्दे हमने अदालत के सामने रखे हैं।”

ईडी ने 5 मई को इस मामले में ईसीआईआर दर्ज की थी। इसके बाद एजेंसी ने संजीव अरोड़ा के चार परिसरों पर छापेमारी की, जिनमें उनका आवास, उनसे जुड़ी संस्थाएं और हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड (एचएसआरएल) का एक कार्यालय शामिल था।

157.12 करोड़ रुपये के मोबाइल फोन बेचे

ईडी के अनुसार, एचएसआरएल पर संजीव अरोड़ा और उनके परिवार का नियंत्रण था। एजेंसी ने दावा किया कि वित्त वर्ष 2023-24 में कंपनी ने कई घरेलू और विदेशी संस्थाओं को 157.12 करोड़ रुपये के मोबाइल फोन बेचे। ईडी ने आरोप लगाया कि संजीव अरोड़ा उस समय एचएसआरएल के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर थे और कंपनी के कारोबार के संचालन के लिए जिम्मेदार थे।

इस मामले पर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने रविवार को संजीव अरोड़ा की तारीफ करते हुए कहा, “मुश्किल वक्त में इंसान का चरित्र सामने आता है। संजीव अरोड़ा ने बीजेपी में शामिल होने की बजाय जेल जाना पसंद किया। उन्हें सलाम।”

वहीं, पंजाब सरकार में मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ ने आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं पर बीजेपी में शामिल होने का दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है। दूसरी ओर, पंजाब बीजेपी अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने आप सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि राज्य में “कुशासन” का दौर अब खत्म होने वाला है।