नई दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की मुलाकात ने भारत-यूएई रणनीतिक साझेदारी में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। 19 फरवरी, 2026 को हुई इस द्विपक्षीय वार्ता में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और उन्नत तकनीकों को आपसी सहयोग के मुख्य स्तंभ के रूप में पहचाना गया। दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था को दिशा देने में एआई की भूमिका निर्णायक होगी, और दोनों देश एक स्मार्ट और साझा भविष्य के निर्माण के लिए इस क्षेत्र में अपने संसाधनों का मिलान करेंगे।
इस ऐतिहासिक बैठक का सबसे महत्वपूर्ण परिणाम भारत में एक सुपरकंप्यूटिंग क्लस्टर की स्थापना के लिए हुए समझौते को माना जा रहा है। भारत के 'सी-डैक' (C-DAC) और यूएई की प्रमुख एआई कंपनी 'G42' तथा मोहम्मद बिन जायद यूनिवर्सिटी ऑफ एआई के बीच इस संबंध में सहयोग की रूपरेखा तैयार की गई है। यह सुपरकंप्यूटर क्लस्टर भारत के 'एआई इंडिया मिशन' का हिस्सा बनेगा और सार्वजनिक व निजी क्षेत्रों के लिए अनुसंधान और वाणिज्यिक अनुप्रयोगों के लिए उपलब्ध होगा। यह पहल न केवल तकनीकी बुनियादी ढांचे को मजबूत करेगी, बल्कि ग्लोबल साउथ में नवाचार के नए रास्ते भी खोलेगी, जो पीएम मोदी के 'एआई फॉर ह्यूमैनिटी' के दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के अलावा, दोनों नेताओं ने अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा और रक्षा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में भी सहयोग का विस्तार करने पर चर्चा की। इस मुलाकात के दौरान भारत-यूएई व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (CEPA) के चार सफल वर्ष पूरे होने पर भी संतोष व्यक्त किया गया, जिसने द्विपक्षीय व्यापार को ₹100 बिलियन के पार पहुँचाने में मदद की है। पीएम मोदी ने यूएई के संप्रभु धन कोष (Sovereign Wealth Funds) को भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास में निवेश जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया। इस प्रकार, यह मुलाकात न केवल तकनीकी मोर्चे पर बल्कि आर्थिक और सामरिक दृष्टि से भी दोनों राष्ट्रों के बीच 'भरोसेमंद साझेदारी' को एक नई ऊंचाई पर ले जाने वाली साबित हुई है।
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